झूठे केस पर सख्त फैसला—दुष्कर्म और एससी-एसटी एक्ट में फंसाने वाली महिला को 10 साल की सजा

फर्श से अर्श तक

दतिया
दुष्कर्म व एससी-एसटी एक्ट में झूठा मामला दर्ज कराने पर महिला को 10 वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार 500 रुपये के अर्थदंड की सजा न्यायालय ने सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजेश भंडारी ने वैभवी सनोरिया प्रकरण में शुक्रवार को यह फैसला सुनाया।

कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि हाल के समय में झूठे प्रकरण दर्ज कराने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जो न्याय प्रणाली के लिए गंभीर चिंता का विषय है। ऐसे मामलों से न केवल न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होती है, बल्कि आम लोगों के बीच न्याय व्यवस्था के प्रति अविश्वास भी बढ़ता है।
 
मामले के अनुसार, वैभवी सनोरिया ने थाना बड़ौनी में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि 22 सितंबर 2021 की रात उसका पड़ोसी कालीचरण घर में घुस आया और उसके साथ दुष्कर्म किया। साथ ही आरोपित पर जान से मारने की धमकी देने का आरोप भी लगाया गया था।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपित के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच पूरी की और चालान अदालत में पेश किया। विचारण के दौरान मामला पूरी तरह पलट गया, जब फरियादिया अपने ही बयान से मुकर गई। उसने अदालत में स्वीकार किया कि रुपये के लेनदेन के विवाद के चलते उसने कालीचरण के खिलाफ झूठा मामला दर्ज कराया था। इस खुलासे के बाद विशेष न्यायाधीश ने आरोपित कालीचरण को दोषमुक्त कर दिया।

साथ ही फरियादिया के खिलाफ झूठा मामला दर्ज कराने के संबंध में कार्रवाई के आदेश दिए गए। अदालत के निर्देश के बाद वैभवी सनोरिया के खिलाफ नया प्रकरण दर्ज किया गया। प्रकरण में शासन की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक अरुण कुमार लिटोरिया ने पैरवी की। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पांच गवाहों के बयान प्रस्तुत किए।

अदालत ने वैभवी सनोरिया को धारा 182, 195 एवं 211 के तहत दोषी ठहराया। सभी साक्ष्यों और तर्कों के आधार पर अदालत ने आरोपों को प्रमाणित माना और दोष सिद्ध होने पर सजा सुनाई।

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