सिंहस्थ 2026 के लिए उज्जैन में 2,451 करोड़ का निवेश, पीने के पानी और सीवरेज सिस्टम में सुधार

मध्य प्रदेश राज्य

उज्जैन
 बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन को वैश्विक स्तर के धार्मिक और पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए सरकार ने मास्टर प्लान तैयार कर लिया है। इस योजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा शिप्रा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाना और घाटों का विस्तार करना है। इसके लिए ₹2,698 करोड़ की भारी-भरकम राशि आवंटित की गई है, जो नदी के जीर्णोद्धार और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर खर्च होगी।

गंदे पानी से मिलेगी मुक्ति
शिप्रा में मिलने वाले कान्ह नदी के प्रदूषित पानी को रोकने के लिए ₹919 करोड़ का क्लोज्ड-डक्ट डायवर्जन प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है। इसके तहत 30 किलोमीटर लंबी नहर और टनल प्रणाली बनाई जाएगी। इसके अलावा, ₹614 करोड़ के सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी प्रोजेक्ट के जरिए 51 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी का भंडारण और विनियमन किया जाएगा, जिससे नदी में जल स्तर बना रहे।

2.5 करोड़ श्रद्धालुओं के लिए बन रहे हैं नए घाट
आगामी सिंहस्थ और प्रमुख स्नान पर्वों को देखते हुए घाटों का अभूतपूर्व विस्तार किया जा रहा है। ₹778 करोड़ की लागत से 29.21 किलोमीटर नए घाट विकसित किए जाएंगे। वहीं, पुराने 9 किलोमीटर के घाटों को अपग्रेड किया जा रहा है ताकि भीड़ के दिनों में एक साथ 2.5 करोड़ श्रद्धालु सुरक्षित रूप से स्नान कर सकें।

मेडिकल कॉलेज और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का तोहफा
केवल नदी ही नहीं, बल्कि शहर के ढांचे को भी आधुनिक बनाया जा रहा है:
स्वास्थ्य: ₹592 करोड़ की लागत से 500 बेड का मेडिकल कॉलेज बनेगा।
पर्यटन और व्यापार: ₹284 करोड़ से यूनिटी मॉल और पर्यटन सर्किट, उज्जैन-ओंकारेश्वर-महेश्वर-मांडू का विकास।

शहरी सुविधाएं: ₹2,451 करोड़ पेयजल, सीवरेज और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए। इसमें 250 MLD का ट्रीटमेंट प्लांट और 700 किमी लंबा पाइपलाइन नेटवर्क शामिल है।

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