नामांतरण के लिए नया निर्देश, पार्टनरशिप डॉक्यूमेंट्स नहीं होंगे स्वीकार

मध्य प्रदेश राज्य

भोपाल 

भोपाल शहर में नामांतरण कराने वालों के लिए खबर है। अब एमओयू, अनुबंध या पार्टनरशीप के दस्जावेजों को नामांतरण का आधार नहीं बनाया जाएगा। प्रशासन की ओर से तहसील कार्यालयों को इसे लेकर स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं। रजिस्टर्ड डीड की बजाय अन्य दस्तावेज लगाकर नामांतरण के लिए आ रहे आवेदनों की संख्या व स्थिति देखने के बाद ये निर्देश दिए गए हैं। प्रदेश समेत जिले में नामांतरण के लिए खरीद-बिक्री की रजिस्डर्ट डीड, विरासत दस्तावेज, गिफ्ट डीड, वसीयत, विभाजन, कोर्ट आदेश, पट्टा या अधिकार पत्र को आधार बनाया।

इसलिए दिए ये निर्देश
दरअसल कंपनियों के आपसी मर्जर एग्रीमेंट से नामांतरण के आवेदन आ रहे हैं। आठ नजूल क्षेत्रों में इस समय 100 से अधिक आवेदन हैं। मर्जर में कंपनी का संचालन तो चल जाता है, लेकिन पुरानी कंपनी के नाम रजिस्टर्ड संपत्ति का हस्तांतरण नहीं होता है। अन्य प्रदेशों की हाइकोर्ट ने कुछ मामलों में मर्जर एग्रीमेंट से नामांतरण के आदेश दिए। जिले में नामांतरण के लिए लगे मामलों में इन्हीं कोर्ट के आदेश का आधार लिया जा रहा है। ऐसे में प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में भू राजस्व संहिता 1959 में रजिस्टर्ड डीड का ही उल्लेख है। ऐसे में यहां इस तरह के मामलों में अन्य दस्तावेज से किए आवेदनों को अमान्य किया जाए।

रोजाना 700 आवेदन, 15% अन्य दस्तावेज वाले
इस समय रोजाना 700 आवेदन विभिन्न माध्यमों से नामांतरण के लिए दर्ज होते हैं। 50 फीसदी आवेदन पारिवारिक संपत्ति, बंटवारा, वसीयत के हैं, जबकि 30 फीसदी नई संपत्ति खरीदी-बिक्री वाले हैं। बाकी में अन्य दस्तावेज हैं। इन पर ही सवाल उठ रहा है। प्रशासनिक स्तर पर गलती न हो इसलिए अलर्ट भेजा गया है। गौरतलब है कि हुजूर तहसील में किंगफिशर के विजय माल्या की एक संपत्ति के नामांतरण का काफी विवाद बना था।

नामांतरण को लेकर शासन ने दस्तावेज व नियम तय किए हुए हैं। इन्हीं के आधार पर हो। इसे ही सुनिश्चित कराया जा रहा है।- प्रकाश नायक, एडीएम

33 अवैध कालोनी के नामांतरण पर लगी रोक
शहर में 70 अवैध कॉलोनियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी, जबकि 63 लोगों पर नामजद एफआइआर दर्ज की है। प्रशासन की ओर से 33 कॉलोनियों में रजिस्ट्री और नामांतरण पर रोक लगा दी गई है। हताईखेड़ा और रोलूखेड़ी जैसे क्षेत्रों में अवैध निर्माणों को जेसीबी मशीनों की मदद से ध्वस्त किया गया है। अवैध कॉलोनियों की अधिकता वाले क्षेत्रों में रातीबड़, नीलबड़, पिपलिया बरखेड़ी, अमरावदकलां, शोभापुर, रोलूखेड़ी, कानासैय्या, कालापानी, पचामा, थुआखेड़ा, छावनी पठार, विदिशा रोड, बैरसिया रोड, सेवनिया ओंकारा, कोलुआ खुर्द, हथाईखेड़ा, रायसेन रोड, बिशनखेड़ी, कलखेड़ा, करोंद, संतनगर, भौंरी आदि शामिल है।

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