सेमीकंडक्टर सेक्टर को नई उड़ान, केंद्र सरकार की ISM 2.0 पर बड़ी पहल

देश

नई दिल्ली
केंद्र सरकार देश में तेजी से सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के विस्तार के लिए मई तक इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 'आईएसएम 2.0' लाने की तैयारी कर रही है। इसका प्रस्तावित परिव्यय एक लाख करोड़ रुपए से 1.2 लाख करोड़ रुपए के बीच रहने का अनुमान है। एनडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट के मुताबिक, आईएसएम 2.0 को लेकर मंत्रालयों के बीच बातचीत चल रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, वित्त मंत्रालय से मंजूरी का इंतजार कर रहा है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि आईएसएम 2.0 में प्रस्तावित परिव्यय पहले चरण से काफी अधिक होने का अनुमान है, जो कि पहले 76,000 करोड़ रुपए था।

सूत्रों ने आगे बताया कि आईएसएम 2.0 के तहत, सरकार का लक्ष्य कार्यक्रम के दायरे को चिप निर्माण और डिजाइन से आगे बढ़ाकर सेमीकंडक्टर उपकरण, कच्चे माल और अन्य महत्वपूर्ण इनपुट के लिए समर्थन को शामिल करना है, साथ ही पूर्ण-स्टैक बौद्धिक संपदा के निर्माण और आपूर्ति श्रृंखला की लचीलता को मजबूत करने पर भी ध्यान केंद्रित करना है।

सरकार यह कदम ऐसे समय पर उठा रही है, जब वैश्विक अस्थिरता के कारण ग्लोबल आपूर्ति श्रृंखलाओं में लगातार व्यवधान देखने को मिल रहे हैं। गैस आपूर्तिकर्ता, विशेष रसायन निर्माता, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) और अन्य इकोसिस्टम के भागीदार जैसे सहायक खिलाड़ी इस संशोधित ढांचे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है।

दूसरे चरण की एक प्रमुख विशेषता संशोधित डिजाइन-लिंक्ड इंसेंटिव (डीएलआई 2.0) योजना है, जिसके तहत विदेशी कंपनियों को भारतीय कंपनियों के साथ देश के भीतर सेमीकंडक्टर रिसर्च और डेवलपमेंट में साझेदारी करने की अनुमति मिलने की संभावना है। इस पहल से इनोवेशन को गति मिलने और आने वाले वर्षों में 50 तक फैबलेस सेमीकंडक्टर डिजाइन फर्मों के उदय को सपोर्ट मिलने की उम्मीद है।
मार्च 2025 में भारत के पहले 'नैनो इलेक्ट्रॉनिक्स रोडशो' में, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कहा था कि घरेलू सेमीकंडक्टर मांग बाजार 2030 तक 110 अरब डॉलर तक बढ़ने की उम्मीद है।

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