वैशाली
सीबीआई ने साइबर क्राइम के लिए फर्जी तरीके से सिम की खरीद-बिक्री करने वालों के खिलाफ ऑपरेशन चक्र-5 अभियान शुरू किया है। इसके तहत साइबर फ्रॉड की बड़ी घटनाओं में इस्तेमाल मोबाइल सिम के विक्रेताओं पर अंकुश लगाया जाएगा। इस ऑपरेशन के तहत बिहार, असम, राजस्थान, यूपी, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, झारखंड समेत आठ राज्यों में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। वैशाली के कई सिम विक्रेता सीबीआई की रडार पर हैं जिनकी तलाश की जा रही है। चार की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है।
बिहार में बड़े पैमाने पर फर्जी सिम से सिम बॉक्स डिवाइस संचालित किए जाने के कई मामले पकड़ में आ चुके हैं। इस डिवाइस के जरिए अंतरराष्ट्रीय वीओआईपी कॉल को लोकल वॉइस कॉल में परिवर्तित कर साइबर फ्रॉड किया जाता है। सुपौल, समस्तीपुर समेत कई जिलों में इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं। इसमें वैशाली इलाके के कई सिम विक्रेता फर्जी नाम पते पर सिम बेचने में चिह्नित हुए हैं। इस तरह के मामलों में सीबीआई बड़े पैमाने पर साइबर फ्रॉड के लिए सिम बेचने और एजेंट को सिम उपलब्ध कराने वाले डीलर आदि को जांच के रडार पर लिया है।
इस तरह के सिम का न केवल कॉल करने में बल्कि म्यूल खातों को संचालित करने के लिए भी इस्तेमाल किया जा रहा है। फर्जी कंपनियों के नाम पर खोले गए बैंक खातों में देशभर से साइबर फ्रॉड की राशि मंगाकर उसकी निकासी की जा रही है।
ऐसे खातों को संचालित करने में मदद पहुंचाने वाले बैंक कर्मियों का भी सुराग सीबीआई ढूंढ़ रही है। सूत्रों के अनुसार, हाल में हुए कई मामलों में सीबीआई ने असम और बिहार के सिम विक्रेताओं की जांच पड़ताल शुरू की है। वैशाली में कई सिम विक्रेताओं के संबंध में सीबीआई ने जानकारी जुटाई है। आर्थिक अपराध इकाई ने भी चार सिम विक्रेताओं को वैशाली के महुआ इलाके से पूर्व में गिरफ्तार किया था।
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