चंडीगढ़.
हरियाणा सरकार ने राज्य की मंडियों में गेहूं व सरसों की फसल की खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए ई-खरीद प्रणाली में कई नई पहल आरंभ की हैं। इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य फर्जी खरीद पर रोक लगाना, वास्तविक किसानों को लाभ सुनिश्चित करना और पूरी खरीद प्रक्रिया की निगरानी को मजबूत करना है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी स्वयं राज्य की मंडियों में चल रही खरीद प्रक्रिया पर निगाह रखे हुए हैं और अधिकारियों से हर रोज की रिपोर्ट प्राप्त कर रहे हैं। 2026-27 के लिए गेहूं का एमएसपी 2,585 रुपये प्रति क्विंटल है, जो 2025-26 रबी विपणन सीजन के 2,425 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक है। गेहूं के समर्थन मूल्य में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 6.59 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। जौ के एमएसपी में 170 रुपये प्रति क्विंटल (लगभग 8.58 प्रतिशत) की वृद्धि हुई है। सरसों का एमएसपी 6,200 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। राज्य की मंडियों में अब तक करीब 60 लाख टन गेहूं की खरीद हो चुकी है।
हरियाणा सरकार की नई व्यवस्था के तहत पंजीकरण और खरीद से जुड़ी प्रक्रियाओं में सत्यापन को अधिक पारदर्शी बनाया गया है। इससे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि केवल पात्र किसान ही अपनी फसल बेच रहे हैं और किसी प्रकार की गड़बड़ी या फर्जीवाड़ा रोकने में मदद मिल रही है।
ई-खरीद प्रणाली में खरीददार का रजिस्ट्रेशन जरूरी किया गया है। इससे हर लेन-देन का रिकार्ड सुरक्षित रखने में मदद मिल रही है तथा जरूरत पड़ने पर उसकी जांच आसानी से की जा सकेगी। राज्य की मंडियों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था को अनिवार्य किया गया है। इससे खरीद प्रक्रिया की निगरानी रियल-टाइम में संभव हो पा रही है, जबकि किसी भी तरह की अनियमितता पर तुरंत कार्रवाई संभव है। फसल के परिवहन को ट्रैक करने के लिए जीपीएस आधारित निगरानी प्रणाली लागू की गई है। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि फसल कहां से उठाई गई और कहां पहुंचाई गई, जिससे बीच में होने वाली गड़बड़ियों पर रोक लगने में मदद मिलने लगी है।
What do you feel about this post?
Like
Love
Happy
Haha
Sad
