– एसीएस पार्थ सारथी सेन शर्मा के कड़े निर्देश के बाद सिस्टम में आई तेजी, 1.08 लाख से बढ़कर नामांकन 1.24 लाख पार
– शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत चार दिनों में 15,679 नए प्रवेश, 14.4% की तेज बढ़त
– कुल लक्ष्य का 63.6% हासिल, जिलों में बढ़ी जवाबदेही, प्रतिदिन समीक्षा से पूरा प्रशासन एक्शन मोड में आया
लखनऊ
उत्तर प्रदेश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के अंतर्गत नामांकन को लेकर योगी सरकार की सख्ती अब सीधे नतीजों में बदलती दिखाई दे रही है। अपर मुख्य सचिव, बेसिक व माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा के कड़े निर्देश और स्पष्ट चेतावनी के बाद महज चार दिनों में ही पूरे प्रशासनिक तंत्र की रफ्तार बदल गई है और नामांकन प्रक्रिया ने तेज गति पकड़ ली है।
आरटीई के अंतर्गत आवंटित सीटों पर प्रवेश सुनिश्चित कराने को लेकर शासन स्तर से स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि कोई भी पात्र बच्चा प्रवेश से वंचित नहीं रहना चाहिए और जहां भी लापरवाही मिलेगी, वहां सीधे कार्रवाई की जाएगी। इसी सख्ती का असर अब जमीनी स्तर पर स्पष्ट दिखाई दे रहा है। गरीब और वंचित बच्चों के लिए कुल 1,95,740 आवंटनों के सापेक्ष अब तक 1,24,545 बच्चों का नामांकन सुनिश्चित किया जा चुका है, जो कुल लक्ष्य का लगभग 63.6 प्रतिशत है। उल्लेखनीय है कि 22 अप्रैल तक यह संख्या 1,08,866 थी, लेकिन सख्त निर्देशों के बाद चार दिनों में 15,679 नए नामांकन जुड़ गए, जो लगभग 14.4 प्रतिशत की तेज बढ़त को दर्शाता है।
यह उछाल बताता है कि योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति जमीन पर असर दिखाने वाली कार्यशैली है। अब हर जिले में अधिकारी लक्ष्य हासिल करने के लिए पूरी सक्रियता के साथ जुटे हैं और जवाबदेही स्पष्ट हो गई है।
योगी सरकार ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत नामांकन को मिशन मोड में संचालित करते हुए जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग को प्रतिदिन प्रगति की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि समयबद्ध लक्ष्य हासिल करना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी स्तर पर ढिलाई अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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