अंबाला
मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से 1857 की क्रांति और अंबाला के शहीद स्मारक के जिक्र ने इस परियोजना की जिज्ञासा को बढ़ा दिया है।
600 करोड़ रुपये की लागत से अंबाला-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर अंतरराष्ट्रीय शहीदी स्मारक बनाया जा रहा है। यह स्मारक आजादी की पहली लड़ाई को प्रदर्शित करेगा और अनसंग नायकों के बारे में बताएगा।
शहीद स्मारक का कार्य पूर्ण हो चुका है और अब आधिकारिक रूप से उद्घाटन के लिए यह तैयार है। अहम बात है कि इस स्मारक की परिकल्पना कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने की थी। स्मारक का सही से संचालन हो इसके लिए अनिल विज के कहने पर यहां पर करीब 27 कर्मचारियों को तैनात किया जाएगा। इनकी भर्ती परियोजना की नोडल एजेंसी कर रही है।
डिजिटल माध्यम से दिखेगी क्रांति की गाथा
स्मारक के भीतर वीरों की गाथा को डिजिटल फिल्मों और ऑडियो के माध्यम से हिंदी, पंजाबी और अंग्रेजी भाषा में प्रस्तुत किया गया है। यहां पर्यटकों के लिए इंटरप्रेटेशन सेंटर, म्यूजियम, ओपन एयर थिएटर, मेमोरियल टावर और हेलीपैड जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं। निर्माण एजेंसी उद्घाटन के बाद तीन साल तक स्मारक का रखरखाव करेगी।
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