शेड्यूल पंचायत चुनाव की तैयारी तेज, ‘प्रपत्र-1’ पर टिकी उम्मीदवारों की नजर

राज्य

 मधुबनी

बिहार में प्रस्तावित पंचायत आम निर्वाचन 2026 की तैयारियों के बीच राज्य निर्वाचन आयोग ने अहम प्रशासनिक निर्णय लेते हुए ‘प्रपत्र-1’ के प्रारूप प्रकाशन की तिथि में बदलाव कर दिया है।

पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार यह प्रकाशन 27 अप्रैल 2026 को होना था, लेकिन अपरिहार्य कारणों से अब इसे 4 मई 2026 को जारी किया जाएगा। आयोग ने इसके साथ ही आरक्षण निर्धारण से संबंधित पूरी संशोधित समय-सारणी भी जारी कर दी है।

आरक्षण तय करने का आधार:
क्या है ‘प्रपत्र-1’? ‘प्रपत्र-1’ पंचायत चुनाव प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है। इसमें वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर राजस्व ग्रामवार आबादी का विस्तृत ब्योरा शामिल रहता है। इसी के आधार पर ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद के विभिन्न पदों के लिए आरक्षण का निर्धारण किया जाता है।

अर्थात किस वार्ड या पंचायत की सीट महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग या सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित होगी, यह पूरी तरह इसी प्रपत्र पर निर्भर करता है। ऐसे में चुनाव लड़ने के इच्छुक संभावित उम्मीदवारों के लिए यह दस्तावेज निर्णायक भूमिका निभाता है।

संशोधित कार्यक्रम एवं प्रमुख तिथियां: राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी नई समय-सारणी के अनुसार प्रक्रिया इस प्रकार आगे बढ़ेगी-
    4 मई 2026: ‘प्रपत्र-1’ का प्रारूप प्रकाशन
    4 मई से 18 मई 2026: दावा और आपत्तियां दाखिल करने की अवधि
    4 मई से 22 मई 2026: प्राप्त आपत्तियों का निपटारा
    11 मई से 29 मई 2026: अपील वादों की सुनवाई
    5 जून 2026: ‘प्रपत्र-1’ का अंतिम प्रकाशन
    9 जून 2026: जिला गजट में अंतिम आंकड़ों का प्रकाशन

आयोग ने स्पष्ट किया है कि आपत्तियां केवल जनसंख्या संबंधी तथ्यों के आधार पर ही स्वीकार की जाएंगी। अन्य किसी प्रकार की आपत्ति पर विचार नहीं किया जाएगा।

कहां उपलब्ध होगा प्रपत्र-1:
आयोग ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रकाशन के स्थान भी निर्धारित किए हैं। यथा ग्राम पंचायत और पंचायत समिति सदस्य पद के लिए संबंधित ग्राम पंचायत एवं प्रखंड कार्यालय, जिला परिषद सदस्य पद के लिए प्रखंड, अनुमंडल तथा जिला पदाधिकारी कार्यालय साथ ही आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी इसे ऑनलाइन देखा जा सकेगा

अधिकारियों को सख्त निर्देश:
राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि डाटा प्रविष्टि और सत्यापन कार्य को अत्यंत गंभीरता से लिया जाए। संशोधित कार्यक्रम के अनुरूप निर्धारित समय-सीमा के भीतर ‘प्रपत्र-1’ का प्रकाशन सुनिश्चित करने तथा पूरी प्रक्रिया का अक्षरशः पालन करने को कहा गया है।

संभावित उम्मीदवारों में बढ़ी सक्रियता:
तिथि में बदलाव के बावजूद जिले में चुनावी तैयारियों के लिए जुटे संभावित उम्मीदवारों की नजर अब 4 मई पर टिक गई है। इसी दिन यह स्पष्ट हो जाएगा कि उनकी पंचायत या वार्ड की सीट किस वर्ग के लिए आरक्षित होगी।

जिले से लेकर प्रखंड व पंचायत के राजनीतिक हलकों में भी इस बदलाव के बाद सरगर्मी तेज हो गई है। कई संभावित दावेदार अब अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं।

बता दें कि बिहार में वर्ष 2026 के अंत तक पंचायत चुनाव कराए जाने की संभावना है। ऐसे में ‘प्रपत्र-1’ का अंतिम प्रकाशन होते ही आरक्षण की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी और इसके साथ ही चुनावी गतिविधियां और तेज होने की उम्मीद है।

 

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