ग्लोबल मॉडल की ओर पंजाब, शिक्षा-खेती-उद्योग में फिनलैंड-नीदरलैंड जैसा सिस्टम लाने की तैयारी

राज्य

चंडीगढ़.

वैश्विक स्तर की तकनीक और नीतियों को अपनाकर पंजाब को नई रफ्तार देने की तैयारी तेज हो गई है। हाल ही में यूरोपीय देशों के दौरे से लौटे प्रतिनिधिमंडल के अनुभवों के आधार पर सरकार अब खेती, शिक्षा और उद्योग के क्षेत्रों में बड़े बदलाव की दिशा में कदम बढ़ा रही है। इस का मकसद कम संसाधनों में अधिक उत्पादन, बेहतर शिक्षा गुणवत्ता और राज्य में निवेश को आकर्षित करना है।

मुख्यमंत्री भगवंत मान, शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस और उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा ने मंगलवार पत्रकारों से बातचीत में बताया कि फिनलैंड और नीदरलैंड में आधुनिक तकनीक के जरिए खेती को पूरी तरह बदल दिया गया है। पालीहाउस और ग्लास हाउस जैसी तकनीकों से एक स्क्वेयर मीटर में उत्पादन 5-6 किलो से बढ़कर 80-100 किलो तक पहुंच गया है, जबकि पानी की खपत बेहद कम और केमिकल का इस्तेमाल लगभग खत्म हो चुका है। सरकार अब इस मॉडल को पंजाब में भी बड़े स्तर पर लागू करने की योजना बना रही है।

शिक्षा के क्षेत्र में फिनलैंड का मॉडल विशेष रूप से प्रभावी
शिक्षा के क्षेत्र में फिनलैंड का मॉडल विशेष रूप से प्रभावी पाया गया, जहां शिक्षकों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। इसी तर्ज पर पंजाब में भी टीचर ट्रेनिंग और स्कूल सिस्टम को मजबूत किया जाएगा। शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस ने जानकारी दी कि जिन विद्यार्थियों ने हाल ही में ‘जेईई मेन’ (जेईई) परीक्षा पास की है, उन्हें बुधवार को मोहाली स्थित विकास भवन में सम्मानित किया जाएगा। इस मौके पर मुख्यमंत्री भगवंत मान भी मौजूद रहेंगे और छात्रों को सम्मानित कर उनका हौसला बढ़ाएंगे। उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा ने बताया कि दौरे के दौरान अंतरराष्ट्रीय कंपनियों और निवेशकों के साथ सार्थक बातचीत हुई है। एग्री-टेक, फूड प्रोसेसिंग और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में निवेश की अच्छी संभावनाएं बनी हैं।

कुछ कंपनियों ने पंजाब में प्लांट लगाने में रुचि भी दिखाई
कुछ कंपनियों ने पंजाब में प्लांट लगाने में रुचि भी दिखाई है। उन्होंने कहा कि निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकार तेज मंजूरी प्रक्रियाऔर बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने पर काम कर रही है।
इसके अलावा 18 मई को अगला डेलिगेशन विदेश भेजा जाएगा, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल होंगे। अब तक 200 से अधिक लोग ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों में हिस्सा ले चुके हैं। सरकार का मानना है कि इन प्रयासों से पंजाब में आधुनिक खेती, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और औद्योगिक विकास को नई दिशा मिलेगी।

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