चंडीगढ़
पंजाब में रेलवे ट्रैक आतंकियों के निशाने पर है। सोमवार रात पटियाला के शंभू में डेडिकेटेड फ्रेट कारिडोर (डीएफसी) के ट्रैक पर हुए ब्लास्ट ने इस खतरे को और गहरा कर दिया है। सुरक्षा एजेंसियां इसे एक बड़े पैटर्न के तौर पर देख रही हैं, जिसमें रेलवे नेटवर्क को लगातार निशाना बनाने की कोशिशें सामने आ रही हैं।
इससे पहले रेलवे ट्रैक के आसपास सोलर सीसीटीवी कैमरे कैमरे लगाए जाने के मामले सामने आए थे। पांच कैमरे पंजाब में लगे थे। एक पठानकोट व एक कपूरथला में बरामद किया था, लेकिन जालंधर मोगा व पटियाला में लगे तीन कैमरों का पता नहीं।
जांच में पता चला था कि इनका इस्तेमाल जासूसी और ट्रैक की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया जा रहा था। हाल ही में लखनऊ एटीएस (एटीएस) की ओर से भी एक ऐसे नेटवर्क का खुलासा किया गया, जो अलग-अलग इलाकों में रेलवे ट्रैक के आसपास आगजनी जैसी घटनाओं को अंजाम देता था। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस तरह की गतिविधियां बड़े हमलों की तैयारी का हिस्सा हो सकती हैं।
पिछले दो वर्षों के दौरान कई घटनाएं आई सामने
पंजाब में पिछले दो वर्षों के दौरान भी कई घटनाएं सामने आई हैं। 23 जनवरी 2026 में सरहिंद के पास डेडिकेटेड फ्रेट कारिडोर (डीएफसी) रेलवे ट्रैक पर धमाका हुआ था, जिसमें करीब 60 फीट पटरी क्षतिग्रस्त हुई थी। वहीं, 2024 और 2025 में कई बार रेलवे ट्रैक पर लोहे की सरिया या अन्य वस्तुएं रखकर ट्रेन को पटरी से उतारने की कोशिशें हुईं थीं।
विशेषज्ञों का कहना है कि रेलवे ट्रैक, खासकर मालगाड़ियों के रूट, देश की सप्लाई चेन की रीढ़ हैं। कोयला, खाद, अनाज और औद्योगिक सामान की ढुलाई इन्हीं रास्तों से होती है। ऐसे में इनको नुकसान पहुंचाने की कोशिश सीधे तौर पर आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है।
संवेदनशील इलाकों में पेट्रोलिंग बढ़ी
फिलहाल रेलवे, आरपीएफ और राज्य पुलिस ने संवेदनशील इलाकों में पेट्रोलिंग बढ़ा दी है। निगरानी के लिए तकनीकी सर्विलांस और खुफिया इनपुट पर खास ध्यान दिया जा रहा है। फिर भी ऐसे षड्यंत्रों को समय रहते नाकाम करना बड़ी चुनौती है।
पंजाब में रेलवे ट्रैक को उड़ाने की लगातार धमकियां मिल रही थीं। गत 24 अप्रैल को भी पटियाला, बठिंडा, लुधियाना व अमृतसर में ईमेल पर बम से रेलवे ट्रैक उड़ाने की धमकी मिली थी। तीन दिन बाद शंभू में ब्लास्ट की घटना हो गई।
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