सऊदी-यूएई का मास्टरस्ट्रोक, होर्मुज को बायपास कर भारत तक तेल पहुंचाने का निकाला नया रास्ता

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  नई दिल्ली

ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल का युद्ध शुरू होने के बाद जब होर्मुज स्ट्रेट बंद हुआ तो भारत के लिए तेल और गैस की किल्लत हो गई. तेल और गैस के लिए सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे खाड़ी देशों पर निर्भर भारत के लिए होर्मुज का बंद होना बड़ा झटका साबित हुआ. इस बीच रूसी तेल पर लगे बैन के हटने से भारत को राहत मिली लेकिन सऊदी, यूएई से भारत को तेल सप्लाई कुछ समय के लिए लगभग बंद हो गई. लेकिन दोनों खाड़ी देशों ने इसका तोड़ भी निकाल लिया और होर्मुज को बायपास कर कच्चा तेल अब भारत तक पहुंचाने लगे हैं। 

सऊदी अरब से भारत को कच्चे तेल की सप्लाई अब सामान्य हो गई है और यूएई से आने वाली खेप पिछले साल के औसत से काफी ज्यादा चल रही है. ऐसा इसलिए संभव हो सका है क्योंकि दोनों देशों ने होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट के बीच वैकल्पिक बंदरगाहों से लोडिंग बढ़ा दी है। 
 
शिप-ट्रैकिंग फर्म केप्लर के वरिष्ठ रिसर्च एनालिस्ट निखिल दुबे ने इकोनॉमिक टाइम्स से कहा कि सऊदी अरब और यूएई से बढ़ी सप्लाई, ईरान और वेनेजुएला से दोबारा शुरू हुए आयात, और रूस से अधिक खरीद ने खाड़ी क्षेत्र से आई कमी की आंशिक भरपाई की है. इससे अप्रैल में भारत को कच्चे तेल की उपलब्धता बनी रही। 

केप्लर के मुताबिक, 1 से 26 अप्रैल के बीच भारत का औसत कच्चा तेल आयात 44 लाख बैरल प्रतिदिन रहा, जो फरवरी के 52 लाख बैरल प्रतिदिन के मुकाबले करीब 15% कम है. इसकी मुख्य वजह यह है कि भारत के दूसरे सबसे बड़े स्रोत इराक से सप्लाई अभी भी बंद है, साथ ही कुवैत और कतर से भी आपूर्ति रुकी हुई है। 

अप्रैल में सऊदी अरब ने भारत को 6.97 लाख बैरल प्रतिदिन तेल भेजा, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 का औसत 6.68 लाख बैरल प्रतिदिन था. वहीं, यूएई से सप्लाई 6.19 लाख बैरल प्रतिदिन रही, जो पिछले वित्त वर्ष के 4.33 लाख बैरल प्रतिदिन औसत से काफी ज्यादा है। 

सऊदी अरब और यूएई होर्मुज के बंद होने के बीच भारत कैसे पहुंचा रहे अपना तेल?

सऊदी अरब ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए भारत तक तेल भेज रहा है. फारस की खाड़ी स्थित रास तनुरा बंदरगाह से भेजी जाने वाली तेल की खेप 70 लाख बैरल प्रतिदिन क्षमता वाली पाइपलाइन के जरिए लाल सागर के यनबू टर्मिनल तक आ रही है। 

दूसरी ओर यूएई 17 लाख बैरल प्रतिदिन क्षमता वाली ADCOP पाइपलाइन के जरिए तेल को फुजैरा बंदरगाह तक भेज रहा है, जो ओमान की खाड़ी पर स्थित है. इन दोनों देशों के अलावा खाड़ी के अन्य उत्पादक देश अब भी निर्यात के लिए बड़े पैमाने पर होर्मुज पर निर्भर हैं। 

भारत ने ओमान से भी तेल खरीद बढ़ा दी है क्योंकि उसका तेल होर्मुज के जरिए नहीं आता. अप्रैल में भारत को ओमान से 1.01 लाख बैरल प्रतिदिन तेल मिला, जबकि 2025-26 का औसत केवल 18 हजार बैरल प्रतिदिन था। 

युद्ध के बाद रूस और ईरान के तेल पर अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील से भारतीय रिफाइनरों को राहत मिली है, जो होर्मुज संकट के बाद विकल्प तलाश रहे थे। अप्रैल में सात साल बाद ईरान से 1.51 लाख बैरल प्रतिदिन और नौ महीने बाद वेनेजुएला से 2.58 लाख बैरल प्रतिदिन सप्लाई फिर शुरू हुई। हालांकि अमेरिका से भारत को तेल सप्लाई कम रही. अप्रैल में यह घटकर 1.15 लाख बैरल प्रतिदिन रह गई, जबकि 2025-26 का औसत 3.14 लाख बैरल प्रतिदिन था। 

रूस से सप्लाई, जो जनवरी-फरवरी में अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण घटी थी, मार्च में दोगुनी होकर 20 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंच गई थी. लेकिन अप्रैल में रूसी तेल की उपलब्धता कम रही जिस कारण यह घटकर 16 लाख बैरल प्रतिदिन रह गई। 

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