पटना
बिहार सरकार ने राज्य में पत्थर खनन पट्टों की बंदोबस्ती को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब सर्वेक्षण के बाद चयनित आधा दर्जन से अधिक जिलों में पत्थर खनन होगा। इसके पूर्व क्षेत्रों की बंदोबस्ती ई-नीलामी के माध्यम से की जाएगी।
सरकार ने इस काम को प्राथमिकता में करने के लिए मेटल स्क्रैप ट्रेड कारपोरेशन (एमएसटीसी) को ई-नीलामी प्लेटफॉर्म के रूप में चयनित किया है। यह संस्थान पारदर्शी तरीके से आनलाइन नीलामी प्रक्रिया संचालित करेगा।
7 जिलों का कराया सर्वेक्षण
खान एवं भू-तत्व विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, वर्तमान में स्टोन चिप्स के लिए प्रदेश को अन्य राज्यों पर निर्भर रहना होता है। बिहार में पत्थर खनन पर रोक इसकी वजह थी, परंतु अब सरकार ने करीब सात जिलों का सर्वेक्षण कराया है जहां से पत्थर खनन का प्रस्ताव स्वीकृत कर दिया गया है।
सरकार का मानना है कि इस पहल से कई फायदे होंगे। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि राज्य में चल रही सरकारी परियोजनाओं के लिए पत्थर और स्टोन चिप्स उचित दर पर उपलब्ध हो सकेंगे।
इससे निर्माण कार्यों की लागत में कमी आएगी, जिससे सड़कों, पुलों और अन्य विकास योजनाओं को तेजी से पूरा किया जा सकेगा।
बिहार के राजस्व में होगी वृद्धि
इसके अलावा, पत्थर खनन पट्टों की व्यवस्थित बंदोबस्ती से राज्य के राजस्व में भी वृद्धि होगी। अभी तक अवैध खनन या अनियमित प्रक्रियाओं के कारण सरकार को पूरा राजस्व नहीं मिल पाता था, लेकिन ई-नीलामी से यह प्रक्रिया पारदर्शी और नियंत्रित होगी। इस निर्णय से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
खनन कार्यों के संचालन से स्थानीय स्तर पर लोगों को काम मिलेगा, जिससे आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। विभाग का दावा है कि यह कदम राज्य के विकास, राजस्व वृद्धि और आम लोगों को सस्ती निर्माण सामग्री उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
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