बिहार राजनीति में हलचल: भूमिहार नाराजगी के बीच बीजेपी का बड़ा दांव

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पटना

बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और दो डिप्टी सीएम वाली नई सरकार में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पूर्व उप-मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा को कैबिनेट विस्तार तक के लिए इंतजार कराने से भूमिहार समाज में उपजी नाराजगी को भाजपा मैनेज करने में जुट गई है। विधायक बन चुके पार्टी के वरिष्ठ नेता मंगल पांडेय के इस्तीफे से खाली हुई विधान परिषद की एक सीट के लिए हो रहे उप-चुनाव में भाजपा ने 46 साल पुराने कार्यकर्ता अरविंद शर्मा को टिकट दिया है। विधानसभा कोटे की इस सीट पर 202 विधायकों के समर्थन वाले एनडीए के कैंडिडेट अरविंद शर्मा की जीत तय है, जो भूमिहार जाति से हैं। अरविंद शर्मा को टिकट मिलने को पार्टी से शुरुआत से जुड़े कार्यकर्ताओं के समर्पण का इनाम बताया जा रहा है।

अरविंद शर्मा ने गुरुवार को नामांकन के आखिरी दिन पर्चा भरा है। उनके साथ दौरान सीएम सम्राट चौधरी, डिप्टी सीएम विजय चौधरी, जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, जदयू विधायक दल के नेता श्रवण कुमार और लोजपा-आर के विधायक दल के नेता राजू तिवारी समेत एनडीए गठबंधन के अन्य नेता मौजूद रहे। विपक्ष के पास इतने विधायक नहीं हैं कि वो चुनाव लड़ने की भी सोच सके। इसलिए अरविंद शर्मा इस चुनाव में इकलौते कैंडिडेट होने के आधार पर निर्विरोध जीत जाएंगे। कोई कैंडिडेट आ जाता है तो 12 मई को मतदान और फिर उसी शाम को नतीजे आएंगे।

राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की सरकार के दौर में नक्सलियों और रणवीर सेना के संघर्ष का केंद्र रहे जहानाबाद से काटकर बनाए गए अरवल जिले के बंभई गांव के रहने वाले अरविंद शर्मा पटना में रहते हैं। भाजपा में पहले जिलाध्यक्ष और जिलों में प्रभारी रह चुके अरविंद शर्मा को सम्राट चौधरी के प्रदेश अध्यक्ष कार्यकाल में बिहार कार्यालय का प्रभारी बनाया गया था। भाजपा के अध्यक्ष नितिन नवीन के दिवंगत पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा और अरविंद शर्मा एक दौर के नेता हैं और गहरे मित्र रहे हैं।

अरविंद शर्मा एक बार विधानसभा चुनाव लड़ने की रेस में थे, लेकिन टिकट का समीकरण नहीं बन पाया था। अब उनको पक्की जीत वाली सीट से एमएलसी का टिकट मिलने से पुराने कार्यकर्ताओं में उत्साह है कि पार्टी नेतृत्व कब किसे धैर्य का धमाकेदार तोहफा दे, कोई नहीं जानता। विधान परिषद में जून में 9 और सीटें खाली हो रही है, जिसका चुनाव मजेदार होगा। विपक्ष के पास जितने विधायक हैं, उसमें एकजुटता दिखाने पर एक सीट निकल सकती है। बाकी 8 सीटों पर एनडीए के कैंडिडेट बाजी मारेंगे, ऐसा माहौल दिख रहा है। अगले चुनाव में रालोमो अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश कुशवाहा को मौका मिलने को लेकर भी अटकलों का बाजार गर्म है।

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