जबलपुर
हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने 2019 से 2023 के बीच सरकार द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं के मानदेय में की गई कटौती को गलत माना है।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जून 2019 से जून 2023 तक का जो बकाया यानी एरियर्स है, उसे सरकार को छह प्रतिशत ब्याज के साथ चुकाना होगा। कोर्ट ने इसके लिए 120 दिनों की समय सीमा तय की।
इस अवधि के अंदर प्रशासन को 48 महीनों की एरियर्स राशि का भुगतान करना होगा। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को ग्रेच्युटी एक्ट के दायरे में रखने का भी आदेश दिया है।
सीधी निवासी आंगनबाड़ी सहायिका कार्यकर्ता संघ की सचिव विभा पांडे की और से 2019 में याचिका दायर की गई थी। इसमें कहा गया था कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को 10 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता था।
2018 में केंद्र की भाजपा सरकार ने इसमें 1500 की वृद्धि की। लेकिन 2019 में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी तो कार्यकर्ताओं का मानदेय 1500 कम कर दिया गया।
इसी तरह सहायिकाओं का मानदेय भी 7000 से घटकर से 5500 कर दिया गया। अधिवक्ता अरविंद श्रीवास्तव ने बताया कि इसके बाद भाजपा सरकार ने इस कटौती को वापस कर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं के मानदेय 2023 में बहाल कर दिए। लेकिन 2019 से 2023 तक का इन्हें एरियर्स नहीं मिला। इन्हें ग्रेच्युटी भी नहीं मिल रही है।
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