जोधपुर
राजस्थान के जोधपुर जिले में शिक्षा और तकनीक का एक अनूठा संगम देखने को मिल रहा है. जिले के सरकारी स्कूलों में शुरू की गई एक एआई (Artificial Intelligence) आधारित प्रायोगिक परियोजना ने छात्रों के मूल्यांकन और रिपोर्ट कार्ड तैयार करने की पारंपरिक व्यवस्था को पूरी तरह से बदल दिया है. अब शिक्षकों को उत्तर पुस्तिकाओं की जांच के लिए घंटों पसीना नहीं बहाना पड़ता, बल्कि एआई प्रणाली महज कुछ ही सेकंड में यह काम पूरा कर रही है.
लाखों उत्तर पुस्तिकाओं का 'सुपरफास्ट' मूल्यांकन
'योग्यता-आधारित मूल्यांकन और स्कूल रिपोर्टिंग प्रायोगिक परियोजना' के दूसरे चरण के तहत एक बड़ी उपलब्धि हासिल की गई है. अधिकारियों के मुताबिक, कक्षा 6 से 9 तक के 70,000 से अधिक छात्रों का मूल्यांकन किया गया. इसमें हिंदी और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों के 5 मुख्य विषयों (हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान) में कुल 3 लाख से अधिक टेस्ट पेपर जांचे गए. जहां पहले इस पूरी प्रक्रिया में कई हफ्ते लग जाते थे, वहीं अब शिक्षकों के जरिए ऐप से स्कैन की गई कॉपियों का परिणाम मात्र 3 दिनों केअंदर विस्तार के साथ तैयार हो जाता है.
स्कोर कार्ड नहीं, अब 'स्किल्स कार्ड' की बारी
इस नई प्रणाली की सबसे बड़ी खासियत इसका सूक्ष्म विश्लेषण है. अधिकारियों ने कहा कि कुल अंकों पर निर्भर रहने के बजाय, मूल्यांकन अब विशिष्ट दक्षताओं पर आधारित है. उदाहरण के तौर पर यदि कोई छात्र सांख्यिकी में बेहतर है लेकिन भाषा की समझ में कमजोर है, तो रिपोर्ट में इसका स्पष्ट उल्लेख रहता है. रिपोर्ट कार्ड में छात्र के सुधार के लिए विषय-वार विस्तृत जानकारी दी जाती है, जिससे अभिभावकों और शिक्षकों को सटीक दिशा मिलती है.
प्रशासन का विजन, 1000 स्कूलों तक विस्तार
मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी रजनी शेखावत ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम जिले के सभी 15 ब्लॉक के 1,000 से अधिक स्कूलों में लागू है. इसकी शुरुआत अक्टूबर 2025 में पहले चरण के रूप में जोधपुर ब्लॉक के अंग्रेजी माध्यम के 54 सरकारी स्कूलों में की गई थी, जिसमें छठी से आठवीं कक्षा तक के 3,000 से अधिक छात्रों को शामिल किया गया था. इस प्रक्रिया में शिक्षक एक विशेष ऐप के माध्यम से उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करते हैं, जिसके बाद एआई प्रणाली उत्तरों का मूल्यांकन करती है.
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