‘निक्षय मित्र’ पहल से ग्रामीण पंचायतों में टीबी नियंत्रण में सफलता, प्रधानमंत्री के 2025 लक्ष्य की ओर कदम

राज्य

जयपुर

राजस्थान को टीबी की बेड़ियों से आजाद करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक मील का पत्थर पार किया है। प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में चलाए गए गहन 'टीबी नियंत्रण अभियान' के सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं। राज्य स्वास्थ्य विभाग ने वर्ष 2025 के लिए प्रदेश की 6,547 ग्राम पंचायतों को 'टीबी मुक्त' घोषित करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा है।

केंद्र सरकार की मुहर का इंतजार
राज्य स्वास्थ्य विभाग के टीबी नोडल अधिकारी डॉ. पुरुषोत्तम सोनी ने बताया कि राज्य सरकार ने अपने स्तर पर इन 6,547 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त चिह्नित कर लिया है। अब केंद्र सरकार की ओर से अंतिम सत्यापन और आधिकारिक मुहर लगने का इंतजार है, जिसके बाद इन्हें सार्वजनिक रूप से टीबी मुक्त घोषित कर दिया जाएगा।

इन 6 कड़े मानकों पर परखी गई पंचायतों की 'सेहत'
किसी भी पंचायत को टीबी मुक्त घोषित करना इतना आसान नहीं होता। इसके लिए केंद्र सरकार ने छह बेहद कड़े मानक तय किए हैं। राजस्थान की इन 6,547 पंचायतों ने इन सभी संकेतकों पर शानदार प्रदर्शन किया है।
    प्रति 1,000 की जनसंख्या पर टीबी के संदिग्ध मरीजों की पहचान की दर 30 या उससे अधिक होनी चाहिए।
    प्रति 1,000 की आबादी पर टीबी के नए पुष्ट मरीजों की संख्या 1 या उससे कम होनी चाहिए।
    अधिसूचित सभी टीबी रोगियों में से कम से कम 60% मरीजों का 'दवा संवेदनशीलता परीक्षण' (DST) होना अनिवार्य है।
    कम से कम 50% पात्र मरीजों को सीधा आर्थिक लाभ मिला हो और उनके खाते में कम से कम एक भुगतान पहुंच चुका हो।
    इस अभियान के तहत चिन्हित मरीजों को 100% 'पोषण किट' का वितरण सुनिश्चित किया गया हो।
    टीबी के मरीजों में इलाज सफल होने और पूर्ण स्वस्थ होने की दर कम से कम 85% होनी चाहिए।

सिर्फ पहचान ही नहीं, पोषण पर भी जोर
अधिकारियों के अनुसार, इन मानदंडों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि केवल बीमारी को पकड़ना ही काफी नहीं है, बल्कि मरीज को सही निदान, सही पोषण और इलाज पूरा करने तक की पूरी प्रक्रिया की निगरानी की जाती है। 'निक्षय मित्र' पहल ने राजस्थान के गांवों में टीबी मरीजों को सामाजिक और पोषण संबंधी सहारा देने में बड़ी भूमिका निभाई है।

क्यों अहम है यह उपलब्धि?
राजस्थान जैसे भौगोलिक रूप से विशाल राज्य में ग्रामीण स्तर पर टीबी पर नियंत्रण पाना एक बड़ी चुनौती रही है। 6,547 पंचायतों का टीबी मुक्त होने की राह पर बढ़ना यह दर्शाता है कि जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य विभाग, आशा कार्यकर्ता और ग्राम पंचायतों के बीच बेहतर तालमेल रहा है। केंद्र की स्वीकृति मिलने के बाद ये पंचायतें अन्य क्षेत्रों के लिए 'रोल मॉडल' का काम करेंगी।

राज्य सरकार का विजन है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के '2025 तक टीबी मुक्त भारत' के सपने को साकार करने में राजस्थान अग्रणी भूमिका निभाए। इन गांवों के आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि राजस्थान टीबी को मात देने के बेहद करीब पहुँच चुका है।
पुलकित सक्सेना

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