चित्तौड़गढ़
राजस्थान के प्रसिद्ध श्रीसांवलिया सेठ मंदिर में इस साल आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि दान के सभी पुराने रिकॉर्ड टूट गए। पिछले एक साल में मंदिर के भंडार में 337 करोड़ रुपये का चढ़ावा आया है, जो पिछले 34 वर्षों में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। लेकिन इस दान की सबसे रोचक बात यह है कि इसमें एक बड़ा हिस्सा 'भक्ति के मुनाफे' का है।
दुनिया के सबसे अनोखे 'बिजनेस पार्टनर'
भक्तों के बीच मान्यता है कि सांवलिया जी यहां 'सेठ' के रूप में विराजमान हैं। यही कारण है कि देशभर के बड़े कारोबारी और शेयर बाजार के खिलाड़ी भगवान को अपना बिजनेस पार्टनर मानते हैं। यहां दान केवल श्रद्धा से नहीं, बल्कि 'पार्टनरशिप डीड' के तहत आता है।
स्टाम्प पेपर पर होती है 'साझेदारी'
यह जानकर आपको हैरानी होगी कि भक्त यहां बाकायदा स्टाम्प पेपर पर पार्टनरशिप करार बनवाकर लाते हैं। मंदिर में इस तरह के पत्र चढ़ाए जाते हैं-
'मैं निवासी जयपुर, यह साझेदारी करार श्री सांवलिया मंदिर के साथ करता हूं कि मेरे शेयर बाजार और व्यापारिक स्रोतों से होने वाले मुनाफे में 10% हिस्से की साझेदारी ठाकुर जी की रहेगी।' जब मन्नत पूरी होती है और व्यापार चमकता है, तो भक्त अपनी कंपनी के लेटर हेड पर पूरी जानकारी लिखकर लाखों-करोड़ों की राशि ठाकुर जी के चरणों में समर्पित कर देते हैं।
34 साल का रिकॉर्ड टूटा, मुनाफे में डूबे भक्त
भक्तों का अटूट विश्वास है कि एक बार अगर 'सांवलिया सेठ' को अपना पार्टनर बना लिया, तो व्यापार कभी घाटे में नहीं जाता। जैसे-जैसे व्यापार बढ़ता है, मंदिर के भंडार में आने वाली 'प्रॉफिट शेयरिंग' भी बढ़ती जाती है। इसी का नतीजा है कि इस वित्तीय वर्ष में चढ़ावे ने 337 करोड़ का जादुई आंकड़ा छू लिया है।
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