जयपुर
राजस्थान की धरती अब न केवल अपने शौर्य के लिए बल्कि चंदन की खुशबू के लिए भी जानी जाएगी. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्य के वनों को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. रविवार को मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित वन एवं पर्यावरण विभाग की समीक्षा बैठक में उन्होंने अधिकारियों को राज्य के तीन प्रमुख जिलों—बांसवाड़ा, सिरोही और उदयपुर में चंदन के वन विकसित करने के कड़े निर्देश दिए हैं.
वैज्ञानिक पद्धति और सुरक्षा पर जोर
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि चंदन की खेती केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. उन्होंने अधिकारियों को वैज्ञानिक तरीके से मिट्टी का परीक्षण करने और केवल उच्च गुणवत्ता वाले पौधों का चयन करने के निर्देश दिए.
चंदन की लकड़ी बहुमूल्य होती है, इसलिए इसकी सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती है. सीएम ने सख्त लहजे में कहा कि पौधों की निगरानी और सुरक्षा के लिए स्थानीय स्तर पर एक मजबूत तंत्र बनाया जाए ताकि चोरी या किसी भी प्रकार के नुकसान को रोका जा सके.
पर्यावरण के साथ बढ़ेगा रोजगार
इस योजना का दोहरा लाभ होगा. एक ओर जहां राज्य का हरित क्षेत्र (Green Cover) बढ़ेगा, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. चंदन के वन भविष्य में राजस्थान की अर्थव्यवस्था के लिए 'ग्रीन गोल्ड' साबित हो सकते हैं. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से इस परियोजना को मिशन मोड में लेने और दीर्घकालिक विजन के साथ काम करने को कहा है.
पौधों के जीवन की गारंटी जरूरी
बैठक में आगामी पौधारोपण अभियानों की भी समीक्षा की गई. मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल लक्ष्य पूरा करने के लिए पौधे न लगाएं, बल्कि यह सुनिश्चित करें कि लगाए गए पौधे जीवित रहें और बड़े हों. इस दौरान वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री संजय शर्मा भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े और विभागीय प्रगति की जानकारी दी.
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