इंदौर
इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर का भूमिपूजन रविवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव के हाथों होने जा रहा है। 20 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर में अगले पाँच वर्षों में 20 हजार करोड़ रुपये का निवेश होगा। इस इंडस्ट्रियल जोन को बैंकिंग, बीमा, फाइनेंस जैसे अन्य सेक्टरों के लिए डिजाइन किया गया है। इस प्रोजेक्ट के लिए पहले चरण में दो हजार करोड़ रुपये की राशि मंजूर हुई है, जिसमें से 327 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
कॉरिडोर के जरिए आईटी, लॉजिस्टिक्स, फिनटेक, एरोसिटी और ग्रीन इंडस्ट्री जैसे सेक्टर विकसित किए जाएंगे, जिससे बड़े स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इस कॉरिडोर से एक लाख से अधिक रोजगार मिलने की संभावना है।
इंदौर के नैनोद से पीथमपुर के बीच बनने वाले इस कॉरिडोर की एयरपोर्ट से कनेक्टिविटी बेहतर होगी। सरकार की कोशिश है कि यहां परंपरागत उद्योगों के बजाय ऐसे उद्योग विकसित हों, जो भारी मशीनों पर निर्भर न हों। इसी कारण डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर जैसी उन्नत इंडस्ट्री के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं।
इस कॉरिडोर के लिए सबसे बड़ी चुनौती किसानों से जमीन अधिग्रहण की है। लगभग 60 प्रतिशत किसान अपनी जमीन देने के लिए तैयार नहीं हुए हैं। 60 से 70 मीटर चौड़ाई में इस कॉरिडोर को विकसित किया जाएगा, जिससे इंदौर से पीथमपुर के बीच की दूरी 10 किलोमीटर तक कम हो जाएगी और आवागमन भी आसान होगा।
कॉरिडोर के दोनों ओर 300-300 मीटर क्षेत्र में उद्योगों के लिए सरकार जमीन उपलब्ध कराएगी। यह इकोनॉमिक कॉरिडोर सुपर कॉरिडोर से भी जुड़ा होगा, जिसे इंदौर विकास प्राधिकरण ने लगभग दस वर्ष पहले विकसित किया था। यहां टीसीएस, इंफोसिस जैसी कंपनियों के स्पेशल इकोनॉमिक जोन हैं और तीन बड़े शैक्षणिक संस्थान भी स्थित हैं।
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