उत्पीड़न के आरोपों पर बिजली अभियंताओं का आक्रोश, उच्च स्तरीय जांच की उठी मांग

उत्तर प्रदेश राज्य

लखनऊ

बिजली विभाग में दलित अभियंताओं पर कार्रवाई से उबाल है। पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन ने साफ किया है कि अगर एकतरफा कार्रवाई पर दलित अभियंताओं को जल्द न्याय नहीं मिलता तो इस मसले पर आंदोलन होगा, जिसकी सारी जिम्मेदारी पावर कॉरपोरेशन की होगी। एसोसिएशन की प्रांतीय कार्यकारिणी की आपात बैठक रविवार को फील्ड हॉस्टल में हुर्ह। संगठन ने उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप की मांग की है।

संगठन ने कहा कि अगर उच्च स्तरीय कमेटी से जांच करवाई जाए तो स्पष्ट हो जाएगा कि दलित अभियंताओं को निशाना बनाया जा रहा है। अभियंताओं पर कार्रवाई न केवल सेवा नियमों के विपरीत हैं बल्कि सामाजिक न्याय की मूल भावना के विपरीत भी। एसोसिएशन ने अभियंताओं पर निलंबन, पदोन्नति रोके जाने और अनुचित दंड के आरोप लगाए हैं। साथ ही यह भी कहा कि ज्यादातर मामलों में अभियंताओं को राहत के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है।

बैठक में एसोसिएशन के कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा, उपाध्यक्ष नेकीराम, पीएम प्रभाकर अतिरिक्त महासचिव , अजय कुमार (ट्रांसको), अध्यक्ष सुशील कुमार वर्मा, अजय कुमार आदि उपस्थित रहे।

इनपर अनुचित कार्रवाई का आरोप
-नेकीराम (अधीक्षण अभियंता) को मात्र 6 दिन की तैनाती के भीतर प्रतिकूल प्रविष्टि देकर मुख्य अभियंता पद पर पदोन्नति रोक दी गई।

-पूरन चंद (अधीक्षण अभियंता) व नरेश कुमार (अधिशासी अभियंता) को लगभग एक वर्ष से निलंबित रखा गया, वह भी घटिया ट्रांसफार्मर जलने के मामले में, जिससे उनकी पदोन्नति बाधित हुई।

-अजय कुमार (अधीक्षण अभियंता) को फर्जी शिकायतों, जिनमें बामसेफ व पीडीए लोगों की मदद करने के आरोप में निलंबित किया गया।

-निर्भय कुमार (अधिशासी अभियंता) को एक ही मामले में दोहरा दंड दिया गया।

-हरिश्चंद्र वर्मा (मुख्य अभियंता, मध्यांचल) को पिछले 6 माह से गलत आरोपों के आधार पर निलंबित रखा गया, जिनकी पत्नी की लगातार डायलिसिस हो रही है।

-मुकेश बाबू (अधीक्षण अभियंता) को हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी पदोन्नत नहीं किया गया।

-सुनील कुमार, सुधाकर व एनपी सिंह के मामले भी लंबित हैं, जिससे पदोन्नति और टाइम स्केल बाधित।

-पवन कुमार अधिशासी अभियंता लंबे समय से निलंबित

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