लखनऊ
वर्ष 2017 में योगी सरकार के आने के बाद से उत्तर प्रदेश के चीनी उद्योग में बड़े सुधार हुए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार ने गन्ना भुगतान, पेराई क्षमता बढ़ाने, बंद चीनी मिलों को दोबारा शुरू करने और उनके विस्तार पर काम किया है। इससे गन्ना किसानों को पूर्व की सरकारों से कहीं ज्यादा सहयोग मिला है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति में भी बदलाव आया है। साथ ही करीब 10 लाखों लोगों को रोजगार भी मिला है।
वर्ष 2017 से पहले गन्ना किसानों का हजारों करोड़ रुपये का भुगतान बकाया था। गन्ना किसान शासन और मिलों के बीच फंसकर खेती छोड़ने जैसे स्थिति में आ चुके थे। वहीं योगी सरकार के सत्ता में आते ही सबसे पहले गन्ना किसानों के भुगतान की व्यवस्था में सुधार किया गया। गन्ना विभाग के मुताबिक पिछले 9 वर्षों में गन्ना किसानों को 3.16 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड भुगतान किया जा चुका है।
वहीं किसानों का गन्ना खेतों में ही खराब न हो जाए, इसका भी ध्यान रखा जा रहा है। योगी सरकार में चीनी मिलों की पेराई क्षमता बढ़ाकर प्रतिदिन 8.47 लाख टन की जा चुकी है। इससे पिछले 9 वर्षों में रिकॉर्ड 9,156 लाख टन गन्ने की पेराई की गई।
वर्षों से बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर शुरू कराया
गन्ना विभाग के मुताबिक रमाला (बागपत), मुंडेरवा (बस्ती) और पिपराइच (गोरखपुर) जैसी सालों से बंद पड़ी कई चीनी मिलों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर दोबारा शुरू किया गया। 44 से ज्यादा चीनी मिलों का आधुनिकीरण व क्षमता विस्तार किया गया है। इससे गन्ना की पेराई और सप्लाई की व्यवस्था भी काफी आसान हुई है।
10 लाख लोगों को रोजगार मिला
इस समय प्रदेश के 45 जिलों में 122 चीनी मिलें स्थापित हैं, जिसके जरिए योगी सरकार ने 10 लाख लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा किए। इसमें विभिन्न स्तर की योग्यता रखने वाले युवा भी शामिल हैं। योगी सरकार में चीनी मिलों के विस्तार से गन्ना किसानों के साथ पढ़े-लिखे युवाओं के लिए भी रोजगार के नए विकल्प खुले हैं। वहीं दूसरी तरफ एक अन्य उपलब्धि यह भी है कि गन्ना मूल्य भुगतान समय पर होने से ग्रामीण बाजारों में प्रत्येक पेराई सत्र में अब 35 हजार करोड़ रुपये से अधिक का सर्कुलेशन हो रहा है।
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