बिजली उपभोक्ताओं को राहत, स्मार्ट प्रीपेड मीटर पर नई केंद्र नीति लागू

राज्य

 रांची

 केंद्र सरकार ने अप्रैल 2026 में सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के नियमों में बदलाव करते हुए स्मार्ट मीटरों के लिए प्रीपेड बिलिंग को अनिवार्य नहीं रखा है।

अब प्रीपेड सुविधा उपभोक्ताओं के लिए वैकल्पिक हो गई है। संचार नेटवर्क वाले इलाकों में स्मार्ट मीटर लगाने का काम समय-सीमा के अनुसार जारी रहेगा। केंद्र ने साफ कहा है कि किसी भी उपभोक्ता पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर जबरदस्ती नहीं थोपा जाएगा।

इस बीच उत्तर प्रदेश में उपभोक्ताओं के विरोध और बिलिंग संबंधी शिकायतों के कारण अप्रैल 2026 में स्मार्ट मीटर लगाने का काम अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। एक तकनीकी समिति की रिपोर्ट आने तक पुराने मीटर बदलने की प्रक्रिया रोक दी गई है (नए कनेक्शन को छोड़कर)।

झारखंड में क्या है स्थिति?
झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) रिवैंप्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम, विश्व बैंक सहायता प्राप्त झारखंड पावर सिस्टम इम्प्रूवमेंट प्रोजेक्ट और राज्य योजनाओं के तहत स्मार्ट मीटर लगाने का काम लगातार आगे बढ़ा रहा है।

राज्य में कुल 18.5 लाख स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य है, जिसमें 13.41 लाख मीटर केंद्र की योजना के तहत शामिल हैं। जुलाई 2025 तक पूरे राज्य में करीब 7.7 लाख स्मार्ट मीटर लग चुके थे।

रांची 100 फीसदी लक्ष्य की ओर
JBVNL का लक्ष्य है कि राजधानी रांची को पूर्ण रूप से स्मार्ट प्रीपेड मीटर वाला शहर बनाया जाए। अप्रैल 2026 के अंत तक यहां 100 प्रतिशत स्मार्ट प्रीपेड मीटर का लक्ष्य रखा गया है।

वर्तमान में शहर में 3.35 लाख से 3.65 लाख स्मार्ट मीटर लग चुके हैं। इनमें से अधिकांश प्रीपेड मोड में चल रहे हैं। अभी करीब 12,000 मीटर पोस्टपेड मोड में हैं और 13,000 से 16,000 कनेक्शन बाकी हैं। एचईसी क्षेत्र समेत बचे इलाकों में काम तेज गति से चल रहा है।

JBVNL अधिकारियों ने बताया कि मीटर लगाना पूरी तरह मुफ्त है। उपभोक्ता मोबाइल ऐप से अपनी बिजली खपत, बैलेंस की जांच और रिचार्ज आसानी से कर सकते हैं। बैलेंस बहुत कम होने पर स्वचालित कटौती का प्रावधान है, इसलिए उपभोक्ताओं को न्यूनतम बैलेंस बनाए रखने की सलाह दी गई है।

अनिवार्यता पर केंद्र की नई नीति
केंद्र की नई लचीली नीति के बाद झारखंड में भी स्मार्ट प्रीपेड मीटर पूरी तरह जबरदस्ती अनिवार्य नहीं है। फिर भी JBVNL नए कनेक्शन, खराब मीटर बदलने और संचार सुविधा वाले क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर को प्राथमिकता दे रहा है।

झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग के मार्च 2026 के आदेश में स्मार्ट मीटर और पुराने मीटर के बीच अलग बिजली दर नहीं रखी गई है। कुछ इलाकों में प्रीपेड मोड चुनने वालों को 3 प्रतिशत रिबेट जैसी छूट भी दी जा रही है।

स्मार्ट मीटर से लाभ और चुनौतियां
स्मार्ट मीटर से बिजली चोरी कम होने, बिलिंग पारदर्शी बनने और सटीक खपत लेखांकन की उम्मीद है। रांची जैसे शहरों में बिल वसूली की दक्षता बढ़ने के संकेत मिले हैं। लेकिन चुनौतियां भी सामने आई हैं। कुछ उपभोक्ताओं को पुराना बकाया दिखने, बैलेंस संबंधी भ्रम और स्वचालित कटौती की आशंका से परेशानी हुई है।

JBVNL इन शिकायतों को प्राथमिकता से सुलझा रहा है और जागरूकता शिविर लगा रहा है। उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि वे फर्जी लोगों से सावधान रहें और आधिकारिक सुविधा पोर्टल पर ही आवेदन करें।

केंद्र की अप्रैल 2026 की नीति अब राज्यों को ज्यादा लचीलापन दे रही है। यूपी में लगी रोक झारखंड में नहीं है, लेकिन उपभोक्ता शिकायतों को गंभीरता से लेकर सहमति और जागरूकता के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है।

JBVNL का मुख्य लक्ष्य बिजली घाटा कम करना और बिजली विभाग को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। केंद्र की योजना के तहत राष्ट्रीय लक्ष्य मार्च 2028 तक बढ़ाया गया है।

कुछ जगह विरोध के बावजूद झारखंड में यह बदलाव बिजली व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम है, बशर्ते उपभोक्ताओं के हितों का पूरा ख्याल रखा जाए।

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry