आरा में चौंकाने वाला आंकड़ा, दूसरी किस्त के लिए 1% भी नहीं निकले योग्य

राज्य

 आरा

भोजपुर जिले में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत 10-10 हजार की पहली किस्त हासिल करने वाली महिला लाभार्थियों की संख्या चार लाख सत्रह सौ साठ थी। इसके बावजूद जिले में करीब 22 हजार महिलाओं को राशि विलंब से आवेदन करने के कारण नहीं मिल सकी। उन्हें आज भी इस राशि का इंतजार है।

वहीं, दूसरी किस्त के लिए योग्य महिला उद्यमी नहीं मिल रही हैं। जिनको 20-20 हजार रुपए दिए जाने हैं। मई माह में राज्य सरकार ने दूसरी किस्त जारी करने का निश्चय किया है। सभी जिले को पत्र देकर दूसरी किस्त के योग्य महिला उद्यमी की सूची सौंपनी है। भोजपुर जिले में भी सूची तैयार हो रही है। इसमें चौंकाने वाली रिपोर्ट आ रही है।

सूची तैयार करने की जिम्मेदारी ग्राम संगठनों की है। जिले में 1582 ग्राम संगठन हैं। ग्राम संगठन मानक के अनुसार दूसरी किस्त के लिए योग्य जीविका दीदी को चयन कर रहे हैं। इन्हें मानक के अनुसार कुल लाभार्थी के पांच से छह प्रतिशत महिला उद्यमी मिले हैं।

जिला जीविका दीदी के पदाधिकारी मनीष ने बताया कि जिले में पहली किस्त प्राप्त करने वाले अधिकांश महिला उद्यमी अभी अपना रोजगार शुरू नहीं की है। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, जिले में दूसरी किस्त के लिए करीब 24 हजार महिला उद्यमी को मानक के अनुसार योग्य पाया गया है।

दूसरी किस्त के लिए तैयार हो रहा आंकड़ा
विगत फरवरी माह से जिले में महिला उद्यमियों को चयन करने की प्रक्रिया चल रही है। इसमें महिला उद्यमी से 10 हजार रुपए की राशि, क्या रोजगार में शुरू किया, की जानकारी मांगी जाती है।

इस बाबत ग्राम संगठनों ने सात प्रश्न सुनिश्चित किया है। जो महिला उद्यमी उसको पूरा करती हैं, उसी को 20-20 हजार रुपए की किस्त मिलेगी। इनका डेटा पोर्टल पर अपलोड हो रहा है। मुख्यालय भेजने के लिए आज मंगलवार तक अंतिम तिथि निर्धारित थी।
आरा सदर प्रखंड में 1 प्रतिशत भी कम योग्य लाभार्थी

भोजपुर जिले के सबसे अधिक शहरी इलाका आरा सदर प्रखंड में है। यहां पर मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत पहली किस्त हासिल करने वाली महिलाओं की संख्या करीब 26 हजार रही है। इन महिलाओं ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत 10-10 हजार रुपए की राशि प्राप्त की है।

इस प्रखंड में 120 ग्राम संगठन है। दूसरी किस्त के लिए सर्वे के बाद 234 जीविका दीदी को दूसरी किस्त के लायक पाया गया। यह संख्या कुल लाभार्थियों के एक प्रतिशत से भी कम है।

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