हरियाणा इनोवेशन: 7000 रुपये की मशीन से बदलेंगे प्लास्टिक कचरा

अंबाला
बदलते समय के साथ साथ जहां प्लास्टिक कचरा एक गंभीर पर्यावरणीय चुनौती बनकर उभर रहा है, वहीं अंबाला के राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थान के छात्रों ने इस समस्या को अवसर में बदलते हुए एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है. दरअसल चार छात्रों की टीम ने मिलकर एक ऐसी मशीन तैयार की है, जो वेस्ट प्लास्टिक को 3डी प्रिंटिंग फिलामेंट में बदलकर उपयोगी वस्तुओं का निर्माण करती है.
7000 में तैयार किया प्रोजेक्ट
बता दे कि इस प्रोजेक्ट की खास बात यह है कि इसे मात्र 7000 रुपये की लागत में तैयार किया गया है और इसे बनाने में छात्रों को करीब एक महीने का समय लगा है. छात्रों ने अपने शिक्षकों के मार्गदर्शन में इस मशीन को विकसित किया, जो अब न केवल तकनीकी नवाचार का उदाहरण है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है. खासतौर पर इस मशीन की कार्यप्रणाली बेहद सरल और प्रभावी है, इसमें सबसे पहले प्लास्टिक की बोतल को एक कटिंग प्लेट में लगाया जाता है, जहां से वह पतली-पतली स्ट्रिप्स में कट जाती है. इसके बाद इन स्ट्रिप्स को हीटर के माध्यम से गर्म किया जाता है, जिससे वे पिघलकर एक पतले धागे यानी फिलामेंट का रूप ले लेती हैं. यही फिलामेंट 3डी प्रिंटर में इस्तेमाल होकर विभिन्न प्रकार के मॉडल और उत्पाद तैयार करता है.
प्लास्टिक कचरे का होगा सही उपयोग
वहीं इस बारे में लोकल 18 को ज्यादा जानकारी देते हुए इस प्रोजेक्ट से जुड़े छात्र सुहैल ने बताया कि आज के दौर में 3डी प्रिंटिंग की मांग तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में इस मशीन के जरिए न केवल प्लास्टिक कचरे का सही उपयोग किया जा सकता है, बल्कि इससे छोटे स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए जा सकते हैं.उन्होंने कहा कि इस तकनीक की मदद से चाबी के छल्ले, खिलौने, कार्टून कैरेक्टर और अन्य सजावटी वस्तुएं आसानी से बनाई जा सकती हैं, जिन्हें बाजार में अच्छे दामों पर बेचा जा सकता है.उन्होंने बताया कि यह पहल उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा है, जो कम संसाधनों में कुछ नया करने का सपना देखते हैं.जहां एक ओर लोग प्लास्टिक कचरे को जलाकर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं, वहीं इस मशीन की मदद से प्लास्टिक कचरे को आय का साधन बनाया जा सकता हैं ओर आने वाले समय में यह “वेस्ट टू वेल्थ” का एक सशक्त उदाहरण बनकर सामने आएगा.
मशीन के अंदर हीटर मशीन की है मुख्य भूमिका
वही राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थान के अध्यापक अजय ने बताया कि यह मशीन वेस्ट प्लास्टिक को रीसाइकलिंग करके एक बेहतर प्रोडक्ट बनाने में काफी सक्षम है. क्योंकि जिस तरह से लोग अक्सर पानी पीकर प्लास्टिक बोतल को इधर-उधर फेंक देते हैं, तो यह मशीन उस बोतल का उपयोग करके उसे एक 3D मॉडल में बदल देगी. उन्होंने कहा कि जल्द छात्रों द्वारा तैयार की गई इस मशीन को वह मार्केट में भी लॉन्च करेंगे, ताकि जो भी लोग बेरोजगार है उन्हें इस मशीन से एक बेहतर रोजगार मिल सके.
उन्होंने बताया कि वैसे तो यह मशीन अभी छोटे साइज में तैयार की गई है लेकिन अगर इसे थोड़े बड़े आकार में बनाया जाए तो यह बड़े स्तर पर भी स्टैचू तैयार कर सकती है. उन्होंने कहा कि इसके अंदर जो हीटर मशीन और पावर सप्लायर है वह मुख्य भूमिका निभा रहे हैं और साथ ही स्पीड मोटर कंट्रोलर कंप्यूटर की कमांड के बाद कार्य करता है. जिसके बाद यह मशीन काफी कम समय में अलग-अलग तरह के प्लास्टिक मॉडल बना देती है ओर जिसका लोग घरों में सजावट के रूप में भी उपयोग कर सकते हैं.



