रायपुर.
छत्तीसगढ़ में व्यापार करने वाले दुकानदारों और कारोबारियों के लिए बड़ी राहत भरी खबर है। राज्य के श्रम विभाग ने ‘छत्तीसगढ़ दुकान एवं स्थापना नियम, 2021’ में संशोधन का प्रस्ताव जारी किया है। नए नियम के लागू होने से दुकान मालिकों को 24 घंटे के भीतर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट मिलेगा।
नई व्यवस्था में दुकानदारों को अपनी दुकान की ‘श्रम पहचान संख्या’ (लेबर रजिस्ट्रेशन) प्राप्त करने के लिए अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। यही नहीं यदि किसी दुकानदार को अपने पंजीकरण प्रमाण-पत्र में कोई बदलाव (जैसे- नियोजक या भागीदार का नाम, पता, कर्मचारियों की संख्या या कार्य का स्वरूप आदि) करना है, तो इसके लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इसके लिए मात्र 100 रुपये का संशोधन शुल्क तय किया गया है। आवेदन और शुल्क प्राप्ति के 24 घंटे के अंदर ही नया संशोधित प्रमाण-पत्र भी ऑनलाइन जारी कर दिया जाएगा।
श्रम विभाग के नए नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रत्येक दुकान और स्थापना के मालिक की यह जिम्मेदारी होगी कि वह पंजीकरण प्रमाण-पत्र को दुकान के नाम के साथ अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करे। इसे ऐसे स्थान पर लगाया जाना चाहिए, जहां से यह आसानी से देखा और पढ़ा जा सके।
तो दुकानदार की होगी पूरी जिम्मेदारी
चूंकि यह नई डिजिटल व्यवस्था पूरी तरह से स्वघोषणा (सेल्फ डिक्लेरेशन) पर आधारित है, इसलिए विभाग ने कड़ा प्रावधान किया है। यदि आवेदन में दी गई कोई भी जानकारी, तथ्य या दस्तावेज झूठे, त्रुटिपूर्ण या भ्रामक पाए जाते हैं, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी केवल दुकानदार की ही होगी।
सरकार ने 30 दिनों के भीतर मांगे सुझाव
राज्य शासन ने इस राजपत्र अधिसूचना का ड्राफ्ट जारी करते हुए आम जनता और इस नियम से प्रभावित होने वाले व्यक्तियों से आपत्तियां और सुझाव मंगाए गए हैं। अधिसूचना के प्रकाशन की तारीख से 30 दिनों के भीतर उप सचिव, श्रम विभाग, मंत्रालय के कार्यालय में कार्यालयीन समय में अपने सुझाव या आपत्तियां दर्ज कराई जा सकती हैं। तय समय में प्राप्त सुझावों पर विचार करने के बाद ही इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।
इस तरह करना होगा आवेदन
बताया गया है कि इसके लिए श्रम पहचान संख्या के लिए निर्धारित प्रारूप (फॉर्म-2) में ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवश्यक दस्तावेजों और ई-चालान के माध्यम से शुल्क जमा करने के महज 24 घंटे के भीतर वेबपोर्टल के जरिए पंजीकरण प्रमाण-पत्र जारी कर दिया जाएगा। यह प्रमाण- पत्र स्वघोषणा पर आधारित और पूरी तरह से सिस्टम-जनरेटेड होगा, जिसमें किसी भी अधिकारी के फिजिकल हस्ताक्षर की आवश्यकता नहीं होगी।
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