संगठन या केंद्र में बड़ी जिम्मेदारी? बीजेपी में मंगल पांडे के नए रोल पर अटकलें तेज

राज्य

 पटना

बिहार कैबिनेट विस्तार में भले ही मंगल पांडे को जगह नहीं मिली, लेकिन गांधी मैदान में शपथ ग्रहण समारोह के दौरान एक तस्वीर ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी।

मंच पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगल पांडे को गले लगाया, उनकी पीठ थपथपाई और कुछ देर बातचीत भी की। इसके बाद से बीजेपी के भीतर उनके भविष्य को लेकर अटकलें और तेज हो गई हैं।

राजनीतिक जानकार इसे सिर्फ शिष्टाचार नहीं, बल्कि बड़ा राजनीतिक संकेत मान रहे हैं।

मंत्रिमंडल से बाहर, लेकिन चर्चा के केंद्र में मंगल पांडे
सम्राट चौधरी कैबिनेट में इस बार मंगल पांडे का नाम शामिल नहीं किया गया।

लंबे समय तक स्वास्थ्य मंत्री रहे मंगल पांडे बीजेपी के सबसे अनुभवी और भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते हैं।

ऐसे में उनका कैबिनेट से बाहर होना कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को चौंकाने वाला लगा।

अमित शाह की ‘बॉडी लैंग्वेज’ ने बढ़ाई सियासी चर्चा
शपथ ग्रहण समारोह में अमित शाह का मंगल पांडे को गले लगाना और पीठ थपथपाना अचानक चर्चा का विषय बन गया।

बीजेपी की राजनीति में ऐसे सार्वजनिक संकेतों को अक्सर भविष्य की भूमिका से जोड़कर देखा जाता है।

माना जा रहा है कि शाह ने मंच से यह संदेश देने की कोशिश की कि पार्टी में मंगल पांडे की अहमियत अब भी बरकरार है।

संगठन में बड़ी जिम्मेदारी की तैयारी?
बीजेपी सूत्रों के मुताबिक मंगल पांडे को संगठन में बड़ी भूमिका दी जा सकती है।

वे पहले बिहार बीजेपी अध्यक्ष रह चुके हैं और कई राज्यों में चुनाव प्रभारी की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।

पार्टी के भीतर उनकी पहचान रणनीतिक और संकट प्रबंधन करने वाले नेता की रही है।

दिल्ली की राजनीति में एंट्री की अटकलें
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बीजेपी उन्हें राष्ट्रीय महासचिव या किसी बड़े राज्य का प्रभारी बना सकती है।

कुछ नेताओं का यह भी मानना है कि भविष्य में उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है।

यानी बिहार कैबिनेट से बाहर होना उनके राजनीतिक सफर का विराम नहीं माना जा रहा।

सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बीजेपी इस बार नई टीम और नई सामाजिक रणनीति के साथ आगे बढ़ती दिख रही है।

मिथिलेश तिवारी और नीतीश मिश्रा जैसे नए ब्राह्मण चेहरों को आगे लाकर पार्टी ने पीढ़ीगत बदलाव का संकेत दिया है।

इसके साथ ही सामाजिक संतुलन और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की भी कोशिश हुई है।

क्या 2029 की तैयारी में जुटी है BJP?
बीजेपी अब 2029 लोकसभा चुनाव और राष्ट्रीय संगठन विस्तार की रणनीति पर तेजी से काम कर रही है।

ऐसे में अनुभवी नेताओं को सरकार से हटाकर संगठन में बड़ी जिम्मेदारी देना पार्टी की पुरानी रणनीति रही है।

गांधी मैदान में अमित शाह और मंगल पांडे की तस्वीर ने फिलहाल इतना जरूर साफ कर दिया कि बीजेपी में उनकी राजनीतिक भूमिका अभी खत्म नहीं हुई है।

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry