आलू संकट पर सरकार की योजना: निर्यात और नई रणनीति से किसानों को मिलेगा सहारा

उत्तर प्रदेश राज्य

लखनऊ

उत्तर प्रदेश में आलू किसानों की बदहाली दूर होगी। अन्य राज्यों से संपर्क करके वहां आलू भेजने की तैयारी चल रही है। अगले सीजन में बोआई के वक्त ही खपत की रणनीति बनाई जाएगी। इसमें कृषि, उद्यान, विपणन और प्रसंस्करण विभाग मिलकर कार्य करेंगे।

आलू उत्पादन के मामले में देशभर में उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर है। यहां इस वर्ष 246 लाख मीट्रिक टन आलू पैदा हुआ है। आलू बेल्ट के रूप में पहचाने जाने वाले फर्रुखाबाद, कन्नौज, फिरोजाबाद, आगरा सहित आसपास के जिलों में कोल्ड स्टोर भरने से किसानों के खेत में ढेर लगे हैं।

फैक्ट फाइल
    246 लाख मीट्रिक टन कुल उत्पादन
    2363 कोल्ड स्टोर की संख्या प्रदेश में
    131 नए कोल्ड स्टोर इस वर्ष खुले
    202 लाख मीट्रिक टन कोल्ड स्टोर की क्षमता
    172 लाख मीट्रिक टन आलू स्टोर में रखा गया

किसानों की फजीहत को देखते हुए उद्यान विभाग अलग- अलग राज्यों से संपर्क में जुट गया हैं। जिन राज्यों में कम आलू उत्पादन होता है, वहां यूपी का आलू भेजने की तैयारी है। इसमें राजस्थान, हरियाणा, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, दादरा नगर हवेली, दमन दीव आदि हैं। इसी तरह नेपाल में ज्यादा से ज्यादा आलू का निर्यात करने के साथ ही श्रीलंका को भी आलू भेजा जाएगा।

अगले वर्ष के लिए अभी से बनेगी रणनीति
अब अगले वर्ष के लिए आलू से जुड़े सभी विभागों को मिलाकर अभी से संयुक्त कार्ययोजना बनाई जाएगी। इसमें कृषि अनुसंधान परिषद और आगरा में खुल रहे इंटरनेशनल पोटैटो सेंटर के क्षेत्रीय केंद्र से भी मदद ली जाएगी। दो दिन पहले लखनऊ आए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही और विभागीय अधिकारियों के साथ ही बैठक में यह सुझाव दिया है।

निदेशक उद्यान बीपी राम ने बताया कि कुछ व्यापारी नेपाल आलू भेज रहे हैं। श्रीलंका और खाड़ी देशों में भी संभावना देखी जा रही है। व्यापारियों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है। अगले वर्ष यह नौबत न आए, इसके लिए भी अभी से तैयारी की जा रही है।

 

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