लखनऊ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएमजेएवाई) से संबद्ध अस्पतालों का विशेष सत्यापन अभियान चलाया गया। जांच में सामने आया कि 28 डॉक्टर ऐसे थे, जिनके नाम 15 से ज्यादा अस्पतालों से जुड़े हुए थे। वहीं 274 चिकित्सक ऐसे भी मिले, जिनके नाम सात से अधिक अस्पतालों में दर्ज थे। इस तीन दिनी सत्यापन प्रक्रिया में ऐसे सभी संबंधित चिकित्सकों को नोटिस जारी किए गए हैं। जांच में कई ऐसे मामले भी सामने आए जिनमें डॉक्टर पूर्व में किसी अस्पताल से जुड़े थे और वर्तमान में कहीं और हैं। मगर डाटा अपडेट न होने के कारण उनके नाम अभी भी पूर्व अस्पतालों में ही दर्ज हैं।
इससे पहले उत्तर प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य विभाग में लापरवाही, अनियमितताओं और कर्तव्य पालन में कोताही के मामलों में सख्त रुख अपनाते हुए पांच डॉक्टरों को सेवा से बर्खास्त कर दिया था। वहीं, कई स्वास्थ्य अधिकारियों और डॉक्टरों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए थे।
उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, लंबे समय तक बिना सूचना ड्यूटी से अनुपस्थित रहने और चिकित्सा कार्य से दूर रहने के आरोप में पांच चिकित्सा अधिकारियों को सेवा से हटाया गया। बर्खास्त किए गए डॉक्टरों में गोरखपुर जिला अस्पताल की डॉ. अलकनंदा, कुशीनगर सीएमओ कार्यालय में तैनात डॉ. रामजी भारद्वाज, बलरामपुर के डॉ. सौरभ सिंह, अमेठी के सीएचसी जगदीशपुर के डॉ. विकलेश कुमार शर्मा और औरैया के सीएचसी दिबियापुर की डॉ. मोनिका वर्मा शामिल थे।
अंबेडकरनगर के डॉक्टरों पर भी गिरी गाज
सरकार ने अंबेडकर नगर में निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम और अल्ट्रासाउंड केंद्रों के पंजीकरण एवं नवीनीकरण में कथित अनियमितताओं के मामले में सीएमओ डॉ. संजय कुमार शैवाल और डिप्टी सीएमओ डॉ. संजय वर्मा समेत 16 चिकित्सा अधिकारियों के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश दिए थे।
प्रारंभिक जांच में इन अधिकारियों पर सरकारी मानकों के उल्लंघन, पद के दुरुपयोग और निजी हितों के लिए फाइलों को मंजूरी देने के आरोप सही पाए गए। जांच एक अपर जिलाधिकारी समेत तीन सदस्यीय समिति ने की थी।
इन डॉक्टरों की सैलरी वृद्धि पर रोक
सरकार ने कुछ मामलों में वेतनवृद्धि रोकने की कार्रवाई भी की। हमीरपुर में तैनात स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. लालमणि की तीन वेतनवृद्धियां स्थायी रूप से रोकी गई। उन पर आजमगढ़ में तैनाती के दौरान मरीजों से वसूली और दुर्व्यवहार के आरोप लगे थे। इसके अलावा बलरामपुर के डॉ. संतोष सिंह की चार और झांसी की डॉ. निशा बुंदेला की दो वेतनवृद्धियां रोकी गई।
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