सुरक्षा प्रतिष्ठान पर हमले का सच आएगा सामने: मुख्य साजिशकर्ता और पाकिस्तानी नेटवर्क की तलाश तेज

राज्य

जालंधर. 
जालंधर में सुरक्षा बल के मुख्यालय के समीप हुए विस्फोट मामले में पुलिस ने आरोपियों की मौजूदगी में दूसरी बार घटनाक्रम को दोहराकर साक्ष्य जुटाए हैं। सात दिनों की हिरासत के दौरान सुरक्षा एजेंसियां सीमा पार बैठे हैंडलर्स और इस बड़ी साजिश के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने का प्रयास कर रही हैं।

घटना स्थल पर सुरक्षा एजेंसियों का कड़ा एक्शन
सुरक्षा बल के क्षेत्रीय मुख्यालय के मुख्य द्वार के समीप हुए विस्फोट मामले की जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस टीम ने एक बड़ा कदम उठाया है। कानून व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े इस अत्यंत संवेदनशील मामले में पुलिस अधिकारियों ने हिरासत में लिए गए दोनों आरोपियों को साथ लेकर घटना स्थल का गहन निरीक्षण किया। जांच टीम ने इस दौरान पूरे घटनाक्रम को दोबारा दोहराया ताकि विस्फोट को अंजाम देने की सटीक टाइमिंग, दिशा और विस्फोटक रखने के तरीके को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझा जा सके। यह कवायद इसलिए की गई ताकि न्यायालय के समक्ष पुख्ता और अकाट्य तकनीकी साक्ष्य प्रस्तुत किए जा सकें।

सात दिन की हिरासत और मिनट-दर-मिनट जांच
गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपी फिलहाल सात दिनों की लंबी पुलिस हिरासत में हैं, जिससे जांच एजेंसियों को उनसे गहन पूछताछ करने का पर्याप्त समय मिल गया है। इस समय अवधि का उपयोग करते हुए अधिकारी घटना के ठीक पहले और बाद की प्रत्येक गतिविधि का मिलान कर रहे हैं। इस प्रक्रिया में आरोपियों के मोबाइल फोन की लोकेशन, इंटरनेट डेटा का उपयोग और घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज में दिखाई देने वाले दृश्यों का आमने-सामने मिलान किया जा रहा है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि विस्फोटक सामग्री को लाने और उसे वहां सक्रिय करने में किन-किन रास्तों का उपयोग किया गया था।

सीमा पार आतंकी नेटवर्क और वीडियो साक्ष्य की पड़ताल
शुरुआती जांच और पूछताछ में इस पूरे मामले के पीछे एक बेहद खतरनाक नेटवर्क का संकेत मिला है, जिसकी कड़ियां सीमा पार बैठे देश विरोधी तत्वों से जुड़ती दिख रही हैं। मुख्य आरोपी के बारे में यह बात सामने आई है कि वह पड़ोसी देश के एक कुख्यात हैंडलर के साथ सीधे संपर्क में था और विस्फोट को अंजाम देने के तुरंत बाद उसे इस बात की पुष्टि भी भेजी गई थी। इसके अलावा, सुरक्षा एजेंसियां उस डिजिटल साक्ष्य की भी बारीकी से जांच कर रही हैं जिसके तहत घटना स्थल का वीडियो बनाकर आगे भेजा गया था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह वीडियो क्लिप और किन लोगों को साझा की गई थी ताकि इस पूरी साजिश में शामिल स्लीपर सेल और मददगारों का पर्दाफाश किया जा सके।

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