वित्तीय पारदर्शिता के लिए सख्ती, डीडीओ खातों और खर्च का रिकॉर्ड अनिवार्य

राज्य

चंडीगढ़

हरियाणा में 590 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले की चल रही सीबीआइ जांच के बीच प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी) ने सभी विभागों से वर्ष 2025-26 में आहरण एवं संवितरण अधिकारियों (डीडीओ) बैंक अकाउंट में स्थानांतरित किए गए सभी तरह के फंड की जानकारी मांगी है। वित्त विभाग ने सभी विभागाध्यक्षों को तत्काल प्रभाव से वांछित ब्योरा उपलब्ध कराने को कहा है।

आहरण एवं संवितरण अधिकारी खाते सरकारी कार्यालयों के ऐसे बैंक खाते होते हैं जिनका उपयोग मुख्य रूप से सरकारी धन को निकालने और संवितरित करने के लिए किया जाता है। ये खाते सामान्य बचत खाते नहीं, बल्कि सरकारी वित्तीय प्रणाली का हिस्सा होते हैं।

प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी) ने बीते वित्तीय वर्ष में राज्य की समेकित निधि से सरकारी विभागों के डीडीओ बैंक खातों में स्थानांतरित की गई निधियों की जानकारी मांगी है, जिसे मसौदा वित्त लेखा एवं विनियोजन लेखा में शामिल किया जाना है।

सभी विभागों को बताना होगा कि एक अप्रैल तक 2025 तक बैंक खाते रखने वाले डीडीओ की कुल संख्या क्या था और बीते वित्तीय वर्ष में कितने बैंक खाते खोले गए। ओपनिंग बैलेंस क्या था और वर्ष 2025-26 के दौरान डीडीओ बैंक खातों में कितनी राशि जमा की गई।

निधि का स्रोत क्या रहा। कितनी राशि व्यय हुई और कितनी राशि को खर्च नहीं किया जा सका। नए खाते खोलने के लिए किसकी अनुमति ली गई और किस प्रविधान में। विभागों को संबंधित डीडीओ के नाम भी बताने होंगे, जिन पर खातों के संचालन की जिम्मेदारी थी।

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