नेपाल में सीमावर्ती लोगों को राहत, दैनिक वस्तुओं पर शुल्क वसूली पर अदालत का अंतरिम आदेश

राज्य

 सोनबरसा

 नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने नेपाल-भारत सीमा से आम नागरिकों द्वारा लाए जाने वाले 100 रुपये से अधिक मूल्य के दैनिक उपयोग के सामान पर लगाए गए कस्टम शुल्क की वसूली पर अंतरिम रोक लगा दी है।

अदालत के इस आदेश से तराई-मधेश के सीमावर्ती इलाकों में रह रहे लोगों को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश हरि प्रसाद फुयाल और टेक प्रसाद ढुंगाना की संयुक्त पीठ ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद कार्यालय, वित्त मंत्रालय समेत संबंधित निकायों को निर्देश दिया कि अंतिम निर्णय आने तक दैनिक उपभोग की वस्तुओं पर सीमा शुल्क नहीं वसूला जाए।

दरअसल, नेपाल सरकार ने 2 मई 2082 को जारी अधिसूचना के तहत नेपाल-भारत सीमा से लाए जाने वाले 100 रुपये से अधिक मूल्य के सामान पर कस्टम शुल्क अनिवार्य कर दिया था। इस निर्णय के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों में विरोध शुरू हो गया था।लोगों का कहना था कि इससे रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही प्रभावित हो रही है।

सरकार के इसी निर्णय को चुनौती देते हुए अधिवक्ता अमितेश पंडित, आकाश महतो, सुयोग सिंह और प्रशांत विक्रम शाह ने 14 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि यह व्यवस्था सीमा शुल्क अधिनियम 2081 की भावना के विपरीत है तथा आम नागरिकों के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है।

सुनवाई के बाद अदालत ने प्रारंभिक तौर पर याचिकाकर्ताओं की दलीलों को गंभीर मानते हुए अंतरिम आदेश जारी किया। अब अंतिम फैसला आने तक सरकार उक्त प्रावधान के तहत दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर कस्टम शुल्क नहीं ले सकेगी।

जैसे ही फैसले की बाते बाहर आई देश के सभी महत्वपूर्ण मीडिया ने इसे प्राथमिकता में रखा। अब हर जगह न्यायालय के इस निर्णय पर लोगो का एक ही बात कहना है,जिस देश की अदालत सख्त और इमानदार हो,वहां सरकारें अपनी मनमानी नहीं कर सकती।

 

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