झारखंड में सार्वजनिक स्थलों पर गंदगी पर कड़ा रुख, ‘पब्लिक न्यूसेंस’ केस दर्ज

राज्य

गढ़वा

झारखंड में गढ़वा शहर के व्यस्त मझिआंव मोड़ क्षेत्र में सड़क किनारे खुले में मुर्गा काटने और गंदगी फैलाने वाले कारोबारियों के खिलाफ प्रशासन ने कड़ा हंटर चलाया है. सार्वजनिक स्थलों पर मांस, खून, हड्डी और पंख बिखेरकर स्वच्छता को प्रभावित करने संबंधी लगातार मिल रही जनशिकायतों के बाद, सदर अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) संजय कुमार ने सख्त रुख अख्तियार किया है.

अवैध मांस दुकानों पर प्रशासन का एक्शन
एसडीएम ने मझिआंव मोड़ पर अवैध रूप से दुकान चलाने वाले पांच दुकान मालिकों के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 152 के तहत ‘पब्लिक न्यूसेंस’ (जनता को परेशानी पहुंचाना) की कार्रवाई शुरू कर दी है. इसके साथ ही इस मामले में ढिलाई बरतने को लेकर गढ़वा नगर परिषद से भी शो-कॉज की गई है. एसडीएम संजय कुमार ने बताया कि इन अवैध मांस कारोबारियों को पूर्व में भी कई बार हिदायत और चेतावनी दी जा चुकी थी. इसके अलावा, नगर परिषद को भी लिखित रूप से आदेश दिया गया था कि वे नियमित निगरानी रखें और सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता सुनिश्चित कराएं. इसके बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ और आम जनता की परेशानियां बढ़ती गईं, जिसके बाद प्रशासन को यह कड़ा कदम उठाना पड़ा.

पांच दुकानदारों को नोटिस, अन्य इलाकों में भी होगी कार्रवाई
बताया गया कि पहले चरण में मझिआंव मोड़ के पास नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले जिन पांच दुकानदारों/मालिकों को नोटिस जारी कर पक्षकार बनाया गया है, उसमें अजय सिंह (पिता- सूर्यदेव सिंह),अनुरुल हक (पिता- ताजुद्दीन खां),फैजान खान (पिता- लुहू तारीक),इब्राहिम खान (पिता- उस्मान खान),कमलेश अग्रवाल का नाम शामिल हैं . एसडीएम संजय कुमार ने कहा कि पशु-पक्षियों का वध करना और उनके अपशिष्ट को ऐसे ही फेंक देना आम लोगों के स्वास्थ्य और स्वच्छता के साथ खिलवाड़ है. वहां से गुजरने वाले राहगीरों को भयंकर बदबू और असहजता का सामना करना पड़ता है, जो सीधे तौर पर ‘पब्लिक न्यूसेंस’ का गंभीर मामला है. ऐसी ही सख्त कार्रवाई अनुमंडल के अन्य इलाकों में भी चलाई जाएगी.

गंदगी और बदबू पर एसडीएम सख्त
एसडीएम ने कहा कि शहर में स्वच्छ, सुरक्षित और व्यवस्थित माहौल देना प्रशासन की प्राथमिकता है. अब न केवल मुर्गा, मछली और मांस के व्यवसायियों को निर्धारित मानकों और स्वच्छता नियमों का सख्ती से पालन करना होगा, बल्कि नगर निकाय (नगर परिषद) जैसी संस्थाओं को भी अपनी जिम्मेदारी गंभीरता से निभानी होगी, वरना उनपर भी गाज गिरेगी.

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