रोहतास
सोन नदी पर बना 150 साल पुराना ऐतिहासिक एनीकट बराज एकबार फिर पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा।
ब्रिटिश काल में यह प्रमुख पर्यटक स्थल था, जहां लोग नौकायन करने आते थे। सुविधाओं के अभाव में इसकी रौनक फीकी पड़ गई थी।
सोन के सतही जल का उपयोग कर डेहरी, सासाराम और औरंगाबाद शहर के लिए 1350 करोड़ की पेयजल आपूर्ति योजना को लेकर एनीकट बराज के पास जल भंडारण के बाद अब जल संसाधन विभाग इसे नए सिरे से पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कर रहा है।
जल संसाधान विभाग के अधिकारियों के अनुसार 1874 में निर्मित एनीकट बराज सिंचाई के साथ-साथ इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना है।
70 के दशक तक में यहां बड़ी संख्या में पर्यटक आते थे। सोन नदी में नौकायन, बराज के फाटकों से गिरते पानी का नजारा और सूर्यास्त देखने के लिए लोग घंटों बैठते थे। आज भी भारी संख्या में लोग मॉर्निंग वॉक को यहां आते है।
बराज में सिल्ट भरने से जल संग्रहण क्षमता काफी कम हो गई थी। जिससे नहरों में पर्याप्त जलापूर्ति में परेशानी उत्पन्न होने पर 1965 में इंद्रपुरी बराज के निर्माण के बाद पर्यटकों ने आना बंद कर दिया।
फिर नौकायन का आनंद उठा सकेंगे पर्यटक
विभागीय योजना के तहत यहां आधुनिक सुविधाओं के साथ नौकायन फिर शुरू किया जाएगा। बराज परिसर में सेल्फी प्वाइंट, चिल्ड्रेन पार्क, पाथवे, लाइट एंड साउंड शो और फूड कोर्ट बनाए जाएंगे। रात में आकर्षक लाइटिंग से बराज जगमगाएगा।
सोन आरती का हो रहा आयोजन
सामाजिक संगठन द्वारा प्रत्येक रविवार की शाम यहां सोन आरती का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें भारी संख्या में लोग भाग ले रहे है।
सोन तट के सौंदर्यीकरण का डीपीआर तैयार किया जा रहा है। टेंडर के बाद काम शुरू होगा। प्रयास है कि अगले मानसून सीजन तक बराज को पर्यटकों के लिए खोल दिया जाए
अजय कुमार, मुख्य अभियंता जलसंसाधन विभाग डेहरी।
बराज के पुनर्विकास से फिर यहां रोजगार बढ़ेगा और डेहरी की पहचान पर्यटन मानचित्र पर बनेगी।
पहले यहां हर दिन मेला सा लगता रहता था। नाविक, दुकानदार और फोटोग्राफर सभी को रोजगार मिलता था।
अनुभा सिन्हा, शिक्षाविद
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