सहारा केस में बड़ा फैसला, बोकारो आयोग ने निवेशकों के भुगतान के निर्देश दिए

राज्य

बोकारो
 जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने सहारा क्रेडिट को-आपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड के मामले में फैसला सुनाते हुए निवेशकों को परिपक्व राशि भुगतान करने का निर्देश दिया है।

आयोग के अध्यक्ष जय प्रकाश नारायण पांडेय व सदस्य बेबी कुमारी ने यह दिया है। जरीडीह बाजार निवासी राज कुमार प्रसाद एवं उनकी पुत्री रजनी कुमारी ने गोल्डन ए डबल एंड ग्लोबल योजना में राशि निवेश की थी।

निवेश के एवज में में बांड और प्रमाणपत्र जारी किए गए थे। योजनाओं की अवधि पूरी होने के बाद भी निवेशकों को भुगतान नहीं किया गया।

परिवादियों ने आयोग में शिकायत दर्ज कर 34 लाख 27 हजार 982 रुपये की परिपक्वता राशि, 12 प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान का अनुरोध किया। एक लाख रुपये मुआवजा एवं 10 हजार रुपये वाद खर्च की मांग की थी।

विपक्षी पक्ष की ओर से कहा गया कि मामला मल्टी स्टेट को-आपरेटिव सोसाइटी एक्ट के तहत आता है तथा भुगतान केंद्रीय रजिस्ट्रार, सहकारी समितियों के माध्यम से किया जाना है।

दूसरा मामला चीरा चास निवासी मोहम्मद अलीमुद्दीन व इनके पुत्र दानिश हसन ने किया था। सहारा ई शाइन योजना के तहत पचास हजार रुपये जमा किया था। इसी परिपवक्ता राशि एक लाख 13 हजार और अलीमुद्दीन की पत्नी स्वर्गीय फहमिया बानो ने साठ हजार रुपये निवेश किया था।

समय पूरा होने पर भुगतान नहीं हुआ। इसमें भी राशि को भुगतान का आदेश आयोग ने दिया। आयोग ने सुनवाई के दौरान पाया कि निवेश, परिपक्वता अवधि तथा देय राशि संबंधी तथ्यों को विपक्षी पक्ष ने विवादित नहीं किया।

भुगतान नहीं करना सेवा में कमी

आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि उपभोक्ता आयोग को ऐसे मामलों की सुनवाई का अधिकार है तथा भुगतान नहीं करना सेवा में कमी है।

आयोग ने आदेश दिया कि राज कुमार प्रसाद को 19 लाख 92 हजार रुपये तथा रजनी कुमारी को दो लाख 90 हजार 684 रुपये 31 दिसंबर 2026 तक केंद्रीय रजिस्ट्रार, सहकारी समितियों के माध्यम से भुगतान किया जाए। निर्धारित समय सीमा में भुगतान नहीं होने पर छह प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देना होगा।

 

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