चांद से बृहस्पति तक के अद्भुत नजारे, उज्जैन में 8 दिवसीय स्पेस टूरिज्म का रोमांच

मध्य प्रदेश राज्य

उज्जैन
 मध्य प्रदेश का उज्जैन अब विज्ञान और खगोल अध्ययन के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बना रहा है. शहर में मौजूद प्राचीन जीवजी वैधशाला, डोंगला स्थित वरामिहिर वैधशाला, तरामण्डल और विज्ञान केंद्र विज्ञान प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. इसी क्रम में प्राचीन जीवजी वैधशाला में 21 मई से विशेष खगोलीय अवलोकन कार्यक्रम की शुरुवात हुई है जो 28 मई तक चलेगी। 

इस आयोजन में देश-दुनिया से उज्जैन आने वाले पर्यटकों और विज्ञान में रुचि रखने वालों को 8 इंच टेलिस्कोप से अंतरिक्ष के अद्भुत नजारे दिखाए जा रहे हैं. पर्यटक टेलीस्कोप की मदद से चंद्रमा पर मौजूद गड्ढे, बृहस्पति ग्रह की पत्तियों और उसके उपग्रहों का नजदीक से अवलोकन कर रहे हो। 

गाइड दे रहे रोचक जानकारी
मौके पर मौजूद गाइड पर्यटकों के साथ वैज्ञानिक महत्व साझा कर रहे हैं और बड़ी रोचक जानकारियां भी दे रहे हैं. जिससे पहले ही दिन बड़ा उत्साह पर्यटकों में देखा गया. हालांकि इसमे 10 साल से कम उम्र के बच्चों को दूर रखा गया है. वहीं वैधशाला के अधीक्षक के अनुसार, ''शुक्र, बृहस्पति और बढ़ते चंद्रमा का अवलोकन भी करवाया जा रहा है. विज्ञान और आस्था का अनोखा संगम नगरी में पर्यटकों और विद्यार्थियों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। 

छात्र बोला- अभी तक चंद्रमा के बारे में किताबों में पढ़ा था
अनुभव ले चुके पर्यटकों ने चर्चा की. पांचवी कक्षा के हनी ने कहा, ''यह बड़ा ही अद्भुत है, इसमें चंद्रमा की सतह पर गड्ढे, बृहस्पति पर पत्तियां और उसके उपग्रह को बड़ी आसानी से देखा जा रहा है. अभी तक सिर्फ किताबों में पड़ा था लेकिन आज पहली बार इसे करीब से देखकर महसूस किया, यह बहुत ही रोचक था। 

कक्षा सातवीं में पढ़ने वाले प्रिंस ने कहा, ''इसको शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता. जो भी कुछ मैंने देखा उसे में अपने दोस्तों से भी शेयर करूंगा और उन्हें भी यहां आने के लिए आग्रह करूंगा.'' वहीं पर्यटक विकास बोले टेलिस्कोप से 8 दिन के लिए दी गई सुविधा का हर किसी को फायदा उठाना चाहिए. यह बहुत ही अद्भुत और रोचक अनुभव रहा। 

जीवजी वैधशाला अधीकक्ष ने कहा, ''वर्तमान में आकाश में सायं सूर्यास्त के बाद आप पश्चिम दिशा में लठ्ठू की तरह चमकदार शुक्र ग्रह को देख रहे हैं. पश्चिमी आकाश में लगभग 60 अशं पर चमकदार बृहस्पति ग्रह दिखाई दे रहा है. साथ ही शुक्ल पक्ष का प्रतिदिन बढ़ता हुआ हमारा चन्द्रमा तो आकाश में दिख ही रहा है. इस प्रकार तीन खगोलीय पिण्डों के अवलोकन के लिए एवं अपनी जिज्ञासा के समाधान का यह सबसे शानदार अवसर है। 

इन स्थितियों को ध्यान में रखते हुए शासकीय जीवाजी वैधशाला उज्जैन द्वारा उसे 8 दिन के लिए ग्रीष्मकालीन आकाशीय अवलोकन के नाम से शुरू किया है. हर रोज शाम 7:00 बजे से रात 9:00 बजे तक पर्यटक इसका लाभ उठा सकते हैं. सिर्फ शुक्र ग्रह नीचे की स्थिति में होने के कारण शाम 8:00 बजे के बाद टेलीस्कोप की परिधि से बाहर हो जायेगा. इसलिए इसे शाम 8:00 बजे तक ही दिखाया जा सकेगा. आकाशीय अवलोकन के लिये आकाश का खुला होना आवश्यक है. 20 प्रति व्यक्ति शुल्क रखा गया है। 

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