दिल्ली की सियासत में बड़ा मोड़, जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बात पर माने केजरीवाल-सिसोदिया

राज्य

नई दिल्ली

 दिल्ली के कथित आबकारी नीति (शराब घोटाला) मामले से जुड़ी एक बड़ी और महत्वपूर्ण कानूनी अपडेट सामने आई है। हाईकोर्ट की जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के इस केस से अलग होने के बाद, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आखिरकार कोर्ट की कार्यवाही में शामिल होने के लिए राजी हो गए हैं। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के हटने के बाद अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की कमान जस्टिस मनोज जैन के हाथों में आ गई है, जिनकी बेंच के सामने इस केस की नियमित सुनवाई शुरू हो चुकी है।

केजरीवाल के साथ-साथ आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और विधायक दुर्गेश पाठक ने भी इस नई बेंच के सामने सुनवाई में शामिल होने के लिए अपनी हामी भर दी है।

क्या था विवाद और क्यों बदला वकालतनामा?
न्यायिक गलियारों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले काफी समय से आम आदमी पार्टी के नेता इस केस की सुनवाई जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच में होने को लेकर हिचकिचा रहे थे। लेकिन अब जैसे ही यह मामला दूसरी बेंच में ट्रांसफर हुआ, वैसे ही तीनों नेताओं के रुख में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। सोमवार को जब सीबीआई (CBI) द्वारा ट्रायल कोर्ट के फैसले को दी गई चुनौती वाले मामले को जस्टिस मनोज जैन की बेंच के सामने लिस्ट किया गया, तो कोर्ट रूम में एक नई प्रगति देखने को मिली।

अदालत का रिकॉर्ड
सुनवाई के दौरान जस्टिस मनोज जैन ने आधिकारिक तौर पर नोट किया कि अदालत को अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक की ओर से तीन नए 'वकालतनामा' (सुनवाई में शामिल होने का कानूनी पत्र) प्राप्त हो चुके हैं। यह इस बात का सीधा संकेत है कि आरोपी पक्ष अब इस बेंच के सामने जिरह के लिए पूरी तरह तैयार है।

CBI की चुनौती पर अब 16 जुलाई को होगी अगली जंग
गौरतलब है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने निचली अदालत (Trial Court) के एक फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी हुई है। इस मामले की गंभीरता और आरोपियों की ओर से वकालतनामा मिलने के बाद जस्टिस मनोज जैन की कोर्ट ने सभी पक्षों को अपनी दलीलें तैयार करने का समय दिया है।

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