लखनऊ
उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग अब कम पदों वाली भर्तियों के लिए नई परीक्षा व्यवस्था लागू करने की तैयारी में है।
आयोग समान प्रकृति और समान अर्हता वाले पदों के लिए अलग-अलग परीक्षा कराने की बजाय संयुक्त मुख्य परीक्षा आयोजित करने की योजना बना रहा है। नई व्यवस्था सिविल सेवा परीक्षा की तर्ज पर होगी, जिससे भर्ती प्रक्रिया तेज होने के साथ अभ्यर्थियों को भी बड़ी राहत मिलेगी।
आयोग की ओर से प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (पीईटी) 2025 के आधार पर अब तक 13 भर्ती विज्ञापन जारी किए जा चुके हैं। जल्द ही विभिन्न विभागों में सहायक लेखाकार के करीब 1600 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन आने वाला है।
अलग-अलग परीक्षाएं कराने की जरूरत नहीं
आयोग पीईटी अंकों के आधार पर विभिन्न विभागों के रिक्त पदों पर भर्ती के लिए अलग-अलग मुख्य परीक्षाएं आयोजित करता है। प्रत्येक परीक्षा का अलग पाठ्यक्रम निर्धारित होता है। इससे कम पदों वाली भर्तियों में नियुक्ति प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो पा रही थी।
नई प्रणाली के तहत समान पाठ्यक्रम और समान कार्य वाले पदों को एक साथ जोड़कर मुख्य परीक्षा कराई जाएगी। इससे कम पदों वाली भर्तियों के लिए अलग-अलग परीक्षाएं कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
अभ्यर्थियों को आर्थिक खर्च से राहत
आयोग का मानना है कि इससे अभ्यर्थियों को बार-बार फार्म भरने और अलग-अलग परीक्षाओं पर होने वाले आर्थिक खर्च से राहत मिलेगी। साथ ही बड़ी संयुक्त परीक्षाएं होने से परीक्षा केंद्रों के प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और परीक्षा संचालन को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकेगा।
अभ्यर्थियों को अलग-अलग सिलेबस और परीक्षा पैटर्न की तैयारी नहीं करनी पड़ेगी। पीईटी के आधार पर प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों में समूह ‘ग’ के पदों पर भर्ती कराता है।
इनमें राजस्व लेखपाल, ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ), ग्राम पंचायत अधिकारी, कनिष्ठ सहायक, आशुलिपिक, कंप्यूटर आपरेटर, वन रक्षक, आबकारी सिपाही, विधान भवन रक्षक, नलकूप चालक, एएनएम, फार्मासिस्ट, लैब तकनीशियन, कृषि प्राविधिक सहायक, नक्शानवीस, प्लाटून कमांडर, ब्लाक आर्गेनाइजर, प्रवर्तन सिपाही, पूर्ति निरीक्षक, विपणन निरीक्षक, अधिशासी अधिकारी, सहायक सांख्यिकी अधिकारी, सहायक शोध अधिकारी और गन्ना पर्यवेक्षक जैसे कई पद शामिल हैं।
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