बरेली की बीएसए डॉ. विनीता ने निराश्रित गोवंश के लिए समाज से की भावुक अपील

उत्तर प्रदेश राज्य

बरेली

 निराश्रित गोवंशों के लिए भूसा दान को लेकर जारी किए गए पत्र पर बरेली की बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) डॉ. विनीता ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि यह किसी प्रकार का आदेश या दबाव नहीं, बल्कि लोकहित और जीव सेवा का स्वैच्छिक अभियान है। प्रदेश सरकार गो संरक्षण और निराश्रित गोवंश के पालन-पोषण को लेकर लगातार बड़े कदम उठा रही है। सनातन संस्कृति, लोक कल्याण और जनभागीदारी की भावना को केंद्र में रखकर चलाए जा रहे इस अभियान को अब समाज का भी व्यापक समर्थन मिलने लगा है।

बीएसए ने कहा कि इसी कड़ी में बीएसए कार्यालय की ओर से 22 मई 2026 को जारी पत्र में निराश्रित गोवंश के भरण-पोषण के लिए भूसा दान की अपील की गई थी। यह कदम जीव-कल्याण के प्रति मानवीय संवेदना के तहत उठाया गया था, इसे किसी प्रकार के दबाव या आदेश के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए था। मीडिया में इसे भावना के विपरीत दृष्टिकोण से पेश किया गया। इस पत्र में अब आंशिक संशोधन करते हुए स्पष्ट किया गया है कि यह पूरी तरह से स्वैच्छिक सहयोग है। इसमें किसी भी शिक्षक या अन्य स्टाफ पर किसी प्रकार की बाध्यता या दबाव नहीं है।

डॉ. विनीता ने मीडिया से अपील की कि इसे आदेश के रूप में न देखा जाए, बल्कि यह समाज और संस्कृति के संरक्षण से जुड़ा एक पुण्य कार्य है। हमारा मानना है कि गो-संरक्षण केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी और जनकल्याण का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्रदेशभर में गोशालाओं के निर्माण, निराश्रित गोवंशों के संरक्षण, चिकित्सा, चारा व आश्रय की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। इसमें सरकार के साथ आमजन भी स्वेच्छा से जुड़ रहे हैं। उद्देश्य यही है कि कोई भी गोवंश सड़क पर बेसहारा न घूमे और उन्हें सुरक्षित वातावरण मिल सके।

बीएसए डॉ. विनीता ने बताया कि सभी खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) से कहा गया है कि इस अभियान में समाजसेवियों, युवाओं, जागरूक किसानों, ग्राम प्रधानों और सामाजिक संगठनों का सहयोग लिया जाए। जब प्रशासन व समाज मिलकर काम करते हैं तो लोक कल्याण के बड़े लक्ष्य आसानी से पूरे होते हैं। भारतीय संस्कृति में गोसेवा को सदियों से पुण्य और धर्म का कार्य माना गया है। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए समाज में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का भाव विकसित करने का प्रयास है। निराश्रित गोवंशों के लिए भूसा दान जैसी पहल केवल पशु संरक्षण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह मानवीय मूल्यों और सामाजिक सहभागिता को भी मजबूत करती है।

बीएसए ने कहा कि प्रदेशभर में गो संरक्षण अभियान के तहत गांवों और कस्बों में लोगों को जागरूक किया जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों के साथ स्थानीय निकाय, ग्राम पंचायतें और सामाजिक संगठन भी इस मिशन में भागीदारी निभा रहे हैं। प्रयास है कि जन-सहयोग से गोवंश के लिए बेहतर आश्रय, भोजन और देखभाल की स्थायी व्यवस्था विकसित हो सके। यह अभियान किसी दबाव का नहीं, बल्कि संवेदना, संस्कृति और लोकहित का है, जिसमें समाज का हर वर्ग अपनी क्षमता के अनुसार भागीदारी निभा सकता है।

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