Delhi Gymkhana Club का अस्तित्व खतरे में! सरकार ने बनाया बड़ा रोडमैप, 5 जून से शुरू होगा एक्शन

राज्य

नई दिल्ली

दिल्‍ली जिमखाना क्‍लब का अब इतिहास के पन्‍नों में दफन होना अब लगभग तय माना जा रहा है. जिम खाना क्‍लब को लेकर सरकार का पूरा प्‍लान सामने आया गया है. फिलहाल, जिमखाना क्‍लब के मौजूदा प्रबंधन को 5 जून तक का समय मिला हुआ है. यह मियाद पूरा होते ही सरकार की तरफ से एक्‍शन शुरू हो जाएगा. आपको बता दें कि केंद्र सरकार राजधानी के इस क्लब की जमीन वापस लेने की तैयारी में है। 

सरकार का कहना है कि यह इलाका बेहद संवेदनशील और हाई सिक्योरिटी जोन में आता है, इसलिए यहां केवल सरकारी और प्रशासनिक कामकाज से जुड़ी सुविधाएं ही होनी चाहिए. सूत्रों के मुताबिक, सरकार इस जमीन पर सरकारी दफ्तर और अधिकारियों के लिए आवासीय परिसर बनाने की योजना पर काम कर रही है. बताया जा रहा है कि यह सुविधा दिल्ली के मोती बाग इलाके की तरह विकसित की जा सकती है। 

दरअसल, दिल्ली जिमखाना क्लब प्रधानमंत्री आवास लोक कल्याण मार्ग के पास स्थित है. सरकार का मानना है कि इस सुरक्षा क्षेत्र में यह एकमात्र ऐसा निजी संस्थान है, जहां आम सदस्यों की पहुंच बनी हुई है. इसी वजह से केंद्र सरकार ने क्लब की जमीन वापस लेने का फैसला किया है. केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि यह जमीन रक्षा ढांचे को मजबूत करने, सार्वजनिक सुरक्षा और जरूरी प्रशासनिक जरूरतों के लिए चाहिए. सरकार का कहना है कि इस इलाके का इस्तेमाल सार्वजनिक हित से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए किया जाएगा। 

22 मई को भूमि एवं विकास कार्यालय यानी एलएंडडीओ ने दिल्ली जिमखाना क्लब को आदेश दिया था कि वह 5 जून तक जमीन सरकार को सौंप दे. आदेश में रणनीतिक और रक्षा जरूरतों का हवाला दिया गया था. हालांकि, इस फैसले को लेकर विवाद भी शुरू हो गया है. क्लब के कुछ सदस्यों, स्टाफ वेलफेयर एसोसिएशन और अन्य लोगों ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है. इन लोगों ने सरकार के फैसले का विरोध किया है. हाई कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और क्लब प्रबंधन दोनों को नोटिस जारी किया है। 

दिल्ली जिमखाना क्लब का इतिहास काफी पुराना है. इसकी स्थापना 3 जुलाई 1913 को ब्रिटिश शासन के दौरान ‘इम्पीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब’ के नाम से हुई थी. उस समय यह क्लब अंग्रेज अधिकारियों और सैन्य अधिकारियों के लिए बनाया गया था. आजादी के बाद इसके नाम से ‘इम्पीरियल’ शब्द हटा दिया गया. क्लब की ज्यादातर मौजूदा इमारतें 1930 के दशक की बनी हुई हैं. 2022 में राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण यानी एनसीएलटी ने क्लब के प्रबंधन में 15 सरकारी निदेशकों की नियुक्ति को मंजूरी दी थी. यह फैसला क्लब में कथित गड़बड़ियों और कुप्रबंधन के आरोपों के बाद लिया गया था। 

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry