पंचकूला में बड़ा वित्तीय घोटाला, सरकारी पैसे से आरोपियों ने बनाई आलीशान संपत्ति और खरीदी महंगी गाड़ियां

राज्य

पंचकूला/चंडीगढ़.

पंचकूला नगर निगम में करीब 150 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले में निकाली रकम का इस्तेमाल लग्जरी गाड़ियों की खरीद, अचल संपत्तियों में निवेश और कई स्तरों पर धन के ट्रांसफर के लिए किया। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा विशेष अदालत में रखी गई रिपोर्ट के मुताबिक मुख्य आरोपित कोटक महिंद्रा बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक और डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट पुष्पिंदर सिंह ने इस धन से बीएमडब्ल्यू 7 सीरीज, महिंद्रा थार, महिंद्रा स्कॉर्पियो-एन और एक मोटरसाइकिल खरीदी।

मार्च में मामला उजागर होने से पहले इन सभी संपत्तियों और वाहनों को बेच दिया गया। इससे पूर्व ईडी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कोटक महिंद्रा बैंक के पूर्व डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट पुष्पिंदर सिंह को गिरफ्तार कर लिया। एजेंसी ने अदालत में उन्हें इस पूरे कथित घोटाले का ‘मास्टरमाइंड’ बताते हुए दावा किया कि बैंकिंग सिस्टम और पद का इस्तेमाल कर नगर निगम की रकम को अवैध तरीके से बाहर निकाला गया। जांच एजेंसी के अनुसार नगर निगम पंचकूला के नाम पर दो बैंक खाते – 2015073031 और 2046279112 कथित रूप से जाली दस्तावेजों के जरिए खोले और संचालित किए गए। ईडी के अनुसार रजत दहरा को 88.17 करोड़, स्वाति तोमर को 31.58 करोड़, कपिल कुमार को 2.36 करोड़ और विनोद कुमार को 1.41 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए।

10 से 12 चेकों पर किए साइन
कपिल कुमार ने जांच एजेंसी को बताया कि रजत दहरा ने बताया कि अच्छी नौकरी दिलाने का भरोसा देकर उसके नाम पर बैंक खाता खुलवाया और पुष्पिंदर सिंह के घर पर उससे 10-12 चेकों पर हस्ताक्षर करवा लिए। स्वाति तोमर ने बयान में कहा कि उसे भी बैंक खाते खुलवाने के लिए तैयार किया गया। उसके मुताबिक पुष्पिंदर सिंह और उनकी पत्नी प्रीति ठाकुर के प्रभाव में उसने पीएनबी, आइसीआइसीआइ और आइडीएफसी बैंक में खाते खुलवाए। स्वाति ने यह भी कहा कि उसने कभी पुष्पिंदर सिंह, प्रीति ठाकुर, रजत दहरा, आर्यन सिंह, समर मोहन रंगा, सनी गर्ग, प्रियंका गर्ग या उनसे जुड़ी संस्थाओं को कोई कर्ज नहीं दिया और कई लाभार्थियों को वह जानती तक नहीं थी।

आरोपितों को नौ जून तक रिमांड पर भेजा
पुष्पिंदर सिंह ने 2020 से 2023 के बीच रजत दहरा और स्वाति तोमर से 33 करोड़ रुपये ऋण के रूप में मिलने की बात स्वीकार की, जिनका उपयोग कथित तौर पर वाहन और संपत्तियां खरीदने में किया गया। पूर्व नगर निगम लेखा अधिकारी विकास कौशिक के हवाले से एजेंसी ने कहा कि नगर निगम और बैंक के बीच होने वाला भौतिक संवाद पुष्पिंदर सिंह और बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर दिलीप राघव के जरिए होता था।

पहली जून को पुष्पिंदर सिंह की ओर से अदालत में कहा गया कि धनशोधन निवारण कानून की धारा 19 की शर्तें पूरी नहीं हुईं और हिरासत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। इसके बावजूद विशेष अदालत ने अंतिम लाभार्थियों और धन के प्रवाह की जांच के लिए उन्हें 9 जून तक ईडी रिमांड पर भेज दिया।

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