हेरिटेज स्ट्रीट से निखरेगी श्री आनंदपुर साहिब की पहचान, श्रद्धालुओं और पर्यटकों को होगा बड़ा लाभ

राज्य

श्री आनंदपुर साहिब
पंजाब सरकार ने राज्य की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित एवं प्रोत्साहित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए श्री आनंदपुर साहिब के संशोधित हेरिटेज स्ट्रीट प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अध्यक्षता में हुई पर्यटन एवं सांस्कृतिक मामलों की उच्च स्तरीय बैठक में इस महत्वाकांक्षी परियोजना को हरी झंडी दी गई।

यह परियोजना न केवल श्री आनंदपुर साहिब की ऐतिहासिक पहचान को और मजबूत करेगी, बल्कि श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक बेहतर आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक अनुभव भी सुनिश्चित करेगी।

क्या है हेरिटेज स्ट्रीट प्लान?
संशोधित योजना के अनुसार, प्रस्तावित हेरिटेज स्ट्रीट किला आनंदगढ़ साहिब के निकट स्थित गोल चौक से शुरू होगी और तख्त श्री केसगढ़ साहिब पार्क, गुरुद्वारा सीसगंज साहिब तथा गुरुद्वारा भोरा साहिब तक विकसित की जाएगी।

इस हेरिटेज कॉरिडोर का उद्देश्य श्री आनंदपुर साहिब के प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को एक सुव्यवस्थित मार्ग से जोड़ना है, ताकि श्रद्धालुओं को इन पवित्र स्थलों के दर्शन के दौरान एकीकृत आध्यात्मिक यात्रा का अनुभव मिल सके।

धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह परियोजना श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और विरासत अनुभव को नई ऊंचाई प्रदान करेगी। इसके माध्यम से सिख इतिहास और विरासत से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों तक पहुंच आसान होगी और धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने कहा कि परियोजना के क्रियान्वयन से पहले सभी आवश्यक प्रशासनिक और तकनीकी मंजूरियां प्राप्त की जाएंगी। साथ ही, इसके डिजाइन को भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय और अन्य सक्षम प्राधिकरणों से अनुमोदित कराया जाएगा।

निगरानी के लिए हाई-पावर कमेटी
सरकार ने परियोजना के सुचारू और समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति (हाई-पावर कमेटी) गठित करने का भी निर्णय लिया है। यह समिति परियोजना की निगरानी करेगी और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित करेगी।

विरासत संरक्षण पर सरकार का फोकस
पंजाब सरकार का मानना है कि श्री आनंदपुर साहिब सिख इतिहास और आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में हेरिटेज स्ट्रीट परियोजना न केवल ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण में मदद करेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी पंजाब की समृद्ध धार्मिक विरासत से जोड़ने का कार्य करेगी।

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