मध्य प्रदेश राज्य

भोपाल

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण को भविष्योन्मुखी बनाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार हरित आवास तकनीक का उपयोग करने जा रही है। इस नवाचार से स्वच्छ और स्वस्थ भारत के संकल्प को बल मिलेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे आवास बनाए जाएंगे, जो स्थानीय संस्कृति और भू-जलवायु परिस्थितियों के पूरी तरह अनुकूल होंगे। हरित आवासों के माध्यम से जहाँ एक ओर प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण होगा, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। इन आवासों के ज़रिए सौर ऊर्जा जैसी नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा मिलने के साथ संसाधनों की रीसाइकलिंग भी हो सकेगी।

सीएसईबी तकनीक को प्रोत्साहन और प्रशिक्षण

भवन निर्माण में हरित तकनीक को बढ़ावा देने के लिए 'कंप्रेस्ड स्टेबलाइज्ड अर्थ ब्लॉक्स' के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है। महात्मा गांधी ग्रामीण विकास एवं पंचायतराज प्रशिक्षण संस्थान जबलपुर के साथ क्षेत्रीय केंद्रों – जैसे भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन, सिवनी तथा नौगाँव-में सीएसईबी ब्लॉक बनाने वाली मशीनों की स्थापना की गई है। इन संस्थानों में राजमिस्त्रियों, जनपद अधिकारियों और कर्मचारियों को निरंतर प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे इन ब्लॉक्स से प्रोटोटाइप निर्माण कर सकें। भोपाल और इंदौर के केंद्रों द्वारा उक्त ब्लॉक्स से प्रोटोटाइप निर्माण भी किया जा चुका है।

इसे धरातल पर उतारने के लिए प्रत्येक जनपद पंचायत में न्यूनतम 25 आवास सीएसईबी ब्लॉक्स से बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए सीईओ जिला पंचायत और सीईओ जनपद पंचायत के साथ ही आजीविका मिशन एवं ग्रामीण यांत्रिकी सेवा को इसके सफल क्रियान्वयन की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है। हरित आवासों के निर्माण में बांस, स्थानीय मिट्टी और अन्य संसाधनों का विशेष रूप से उपयोग किया जाएगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, इससे न केवल कमरे का तापमान (इनडोर थर्मल कम्फर्ट) और आर्द्रता बेहतर होंगी और गर्मी से राहत मिलेगी, बल्कि स्थानीय सामग्री के उपयोग के चलते कार्बन उत्सर्जन में भी भारी कमी आएगी।

 

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