पंजाब में सरकारी बस सेवाओं पर संकट, PRTC कर्मियों के ऐलान से परिवहन विभाग में हलचल

राज्य

जालंधर.

पनबस-पी.आर.टी.सी. ठेका कर्मचारी यूनियन ने सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि जेलों में बंद कर्मचारियों को रिहा नहीं किया गया और कर्मचारियों की मांगों का समाधान नहीं हुआ तो 22, 23 और 24 जून को हड़ताल करते हुए सरकारी बसों का चक्का जाम किया जाएगा व मुख्यमंत्री के आवास के बाहर धरना-प्रदर्शन किए जाएंगे।

यूनियन नेताओं ने कहा कि इस संघर्ष की शुरूआत 10 जून से पंजाब भर के डिपूओं में रैलियां व सरकार के खिलाफ रोष प्रदर्शनों से होगी। प्रदेश प्रधान रेशम सिंह गिल ने कहा कि सरकार को बने चार वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन एक भी नई सरकारी बस नहीं डाली गई। इसके विपरीत किलोमीटर स्कीम के तहत निजी बसों को बढ़ावा देकर विभाग को निजीकरण की ओर धकेला जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यूनियन नेताओं और कर्मचारियों पर मामले दर्ज कर उन्हें जेलों में बंद किया जा रहा है, ताकि निजीकरण के खिलाफ उठ रही आवाजों को दबाया जा सके।

प्रदेश महासचिव शमशेर सिंह ढिल्लों ने कहा कि सरकार एक तरफ कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने के दावे कर रही है, जबकि दूसरी ओर कर्मचारियों की मूलभूत मांगों को लागू नहीं किया जा रहा। उन्होंने कहा कि समान काम के लिए समान वेतन और अन्य लंबित मुद्दों पर अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। जब तक सरकार अपने फैसलों को धरातल पर लागू नहीं करती, तब तक कर्मचारी संतुष्ट नहीं होंगे।

सीनियर उपप्रधान हरकेश विक्की ने आरोप लगाया कि विभाग की अपनी बसों को डिपो में खड़ा कर निजी किलोमीटर स्कीम की बसों को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे सरकार की निजीकरण संबंधी नीति स्पष्ट हो रही है। उन्होंने कहा कि यदि नई किलोमीटर स्कीम की बसों को शुरू किया गया तो यूनियन काले झंडों के साथ विरोध प्रदर्शन करेगी।

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