ऑनलाइन और भौतिक भूमि अभिलेखों में अंतर खत्म करने के लिए अदालत का अहम आदेश

राज्य

रांची
 झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने राज्य में आनलाइन भूमि अभिलेखों में लगातार हो रही त्रुटियों और विसंगतियों पर चिंता जताते हुए बुधवार को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा है कि आनलाइन भूमि रिकार्ड भौतिक अभिलेखों की हूबहू कापी होनी चाहिए।

इसके लिए अब सभी डिजिटल भूमि अभिलेखों का संबंधित अंचल अधिकारियों (सीओ) द्वारा सत्यापन किया जाएगा और सत्यापन के बाद ही उन्हें डिजिटल हस्ताक्षर के साथ पोर्टल पर प्रदर्शित किया जाएगा। अदालत ने राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव को आदेश का तत्काल अनुपालन सुनिश्चित करने तथा सभी संबंधित अधिकारियों को आवश्यक प्रशासनिक निर्देश जारी करने को कहा है।

वहीं, प्रार्थी को तीन सप्ताह के भीतर अंचल अधिकारी कुड़ू के समक्ष आवेदन देने का निर्देश देते हुए कहा गया कि मामले का निष्पादन 12 सप्ताह के भीतर किया जाए। अदालत ने प्रार्थी राम प्रकाश भगत की याचिका की सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया।

प्रार्थी ने शिकायत की थी कि उसके पूर्वजों के नाम दर्ज भूमि का रिकार्ड भौतिक दस्तावेजों में सही है, लेकिन आनलाइन रजिस्टर और डिजिटल रिकार्ड में किसी अन्य व्यक्ति का नाम दर्ज हो गया है, जिसके कारण उसे परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि राज्य में बड़ी संख्या में रैयत इसी तरह की शिकायतों के साथ हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर रहे हैं। अदालत ने कहा कि डेटा एंट्री में हुई मानवीय त्रुटियों और पर्याप्त सत्यापन तंत्र के अभाव में आनलाइन रिकार्ड और भौतिक अभिलेखों के बीच अंतर उत्पन्न हो रहा है, जिससे नागरिकों को अनावश्यक मुकदमेबाजी करनी पड़ रही है।

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry