फिरोजपुर झिरका का नावली स्कूल अपग्रेड, छात्राओं के ड्रॉपआउट में कमी की उम्मीद

राज्य

नूंह
 विद्यालय शिक्षा विभाग हरियाणा द्वारा जिला नूंह के राजकीय मिडिल स्कूल नावली खंड फिरोजपुर झिरका (कोड-6097) को उन्नत कर राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय का दर्जा प्रदान किया गया है। इस उन्नयन के साथ विद्यालय में शैक्षणिक एवं प्रशासनिक कार्यों के सुचारू संचालन के लिए 21 नए पदों की स्वीकृति भी दी गई है।

स्वीकृत पदों में एक प्रधानाचार्य, 14 पीजीटी (अंग्रेजी, हिंदी, गणित, इतिहास, राजनीति विज्ञान, उर्दू, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, वाणिज्य, अर्थशास्त्र, शारीरिक शिक्षा, भूगोल एवं गृह विज्ञान), एक लिपिक, तीन लैब अटेंडेंट तथा दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शामिल हैं।

मानव संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे
शिक्षा विभाग द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए 10 माह की अवधि के लिए इन पदों के वेतन एवं भत्तों के लिए लगभग एक करोड़ 49 लाख रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है। इस स्वीकृति से विद्यालय में वरिष्ठ माध्यमिक स्तर की शिक्षा के लिए आवश्यक आधारभूत मानव संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे।

विद्यालय के वरिष्ठ माध्यमिक स्तर पर उन्नयन से नावली एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को उच्च माध्यमिक शिक्षा के लिए दूरस्थ विद्यालयों में जाने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे विशेष रूप से छात्राओं की शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा तथा क्षेत्र में शिक्षा के स्तर को नई मजबूती प्राप्त होगी।

विज्ञान पढ़ने का सुनहरा अवसर मिलेगा
स्थानीय ग्रामीणों एवं अभिभावकों ने सरकार और शिक्षा विभाग के इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। वहीं इसी वर्ष से इस विद्यालय में विद्यार्थियों को दाखिला लेने का अवसर मिलेगा,अब छात्राओं को पढ़ने के लिए दूसरे गांव में नहीं जाना पड़ेगा। विद्यार्थियों को गांव में ही आर्ट्स,कामर्स और विज्ञान पढ़ने का सुनहरा अवसर मिलेगा।

छात्राओं का ड्राॅप आउट बढ़ा
बता दें कि वर्तमान समय में विद्यालय में छठी,सातवीं,आठवीं कक्षा में लगभग 220 विद्यार्थी अध्यनरत हैं,जिनमें 50 प्रतिशत से अधिक बेटियां शामिल हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उच्च शिक्षा की सुविधा गांव के स्कूल में उपलब्ध न होने के कारण छात्राओं का ड्राॅप आउट बढ़ रहा था।

विद्यालय को 12वीं तक अपग्रेड करेंगे
बेटियों को पढ़ने के लिए नवाली से पास के सरकारी स्कूल साकरस में जाना पड़ता था,जिसकी दूरी करीब छह किलोमीटर है। जबकि दर्जनों छात्राएं 10 किलोमीटर दूर मांडीखेड़ा स्कूल पढ़ने जाती हैं। सरकारी बस सुविधा उपलब्ध न होने से भी छात्राओं को रोजाना कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। ऐसे में विद्यालय को 12वीं तक का अपग्रेड करना गांव की प्रमुख मांग थी जो आज पूरी हो गई।

 

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