बस्तर में प्रगति की नई बुनाई, कोसा सिल्क उद्योग से हजारों परिवारों की चल रही रोजी-रोटी

छत्तीसगढ़ रायपुर

जगदलपुर.

बस्तर का रैली कोसा सिर्फ एक उत्पाद नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत रीढ़ बन चुका है. महज पांच ग्राम वजन वाले एक कोसा से करीब एक किलोमीटर लंबा धागा तैयार होता है. हर वर्ष करोड़ों की संख्या में कोसा उत्पादन यहां के गांवों में रोजगार का बड़ा माध्यम बनता है.

साल वनों से घिरे बस्तर में रेशम पालन की समृद्ध परंपरा आज भी कायम है. रेशम विभाग द्वारा संचालित प्रगुणन केंद्र इस उद्योग को मजबूती दे रहे हैं. बस्तर में उत्पादित कोसा का प्रसंस्करण प्रदेश के कई जिलों में किया जाता है. यहीं से तैयार वस्त्र देश और विदेश के बाजारों तक पहुंचते हैं. जापान, सिंगापुर, यूएई सहित कई देशों में इसकी मांग बनी हुई है. कोसा वस्त्र अपनी प्राकृतिक बनावट और आरामदायक गुणों के कारण पसंद किए जाते हैं. धागे के अपशिष्ट से भी गलीचे और दरियां तैयार की जाती हैं. महिला समूहों की भागीदारी ने इस उद्योग को और सशक्त बनाया है. कालीपुर क्षेत्र में महिलाएं धागा निर्माण से जुड़कर आय अर्जित कर रही हैं. बस्तर का कोसा अब स्थानीय उत्पाद से आगे बढ़कर वैश्विक पहचान का प्रतीक बन चुका है.

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry