वाशिंगटन
ईरान के साथ चल रही बातचीत के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पीस डील को लेकर बेहद सख्त संकेत दिया है. अरब रिपब्लिक ऑफ मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सिसी के साथ द्विपक्षीय बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि ईरान से जुड़ा मौजूदा मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MOU) अभी अंतिम रूप में नहीं है. यदि उन्हें ये समझौता पसंद नहीं आया, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई के रास्ते पर वापस लौट सकता है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत के बाद एक बेहद मजबूत डील तैयार की गई है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अभी तक कोई पूरी तरह नहीं जानता कि इसका अंतिम स्वरूप क्या होगा।
उनका दावा था कि ज्यादातर लोग इस समझौते से खुश नजर आ रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि इस समझौते का विकल्प पूरी दुनिया में आर्थिक अस्थिरता और मंदी हो सकता है. कुछ लोग दुनिया में मंदी देखना चाहते हैं।
ट्रंप ने कहा कि जो लोग दुनिया में मंदी देखना चाहते हैं, वे बेवकूफ हैं. उनके मुताबिक ऐसे लोग वैश्विक अर्थव्यवस्था और स्थिरता की अहमियत नहीं समझते. ट्रंप ने यह भी कहा, "नंबर एक, स्ट्रेट कभी नहीं खुलेगा।
हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं किया कि वह किस समुद्री मार्ग की बात कर रहे थे. इसके अलावा ट्रंप ने अमेरिका की ओर से ईरान में बड़े निवेश को भी खारिज कर दिया, जिसमें 300 बिलियन डॉलर की बात है।
उन्होंने कहा कि ऐसी खबरें पूरी तरह झूठी हैं. अमेरिका इस समझौते के हिस्से के रूप में किसी तरह का 300 बिलियन डॉलर का निवेश नहीं कर रहा है. ईरान के साथ बातचीत की स्थिति स्पष्ट करते हुए ट्रंप ने कहा कि मौजूदा MOU अभी फाइनल नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा कि यदि उन्हें अंतिम एग्रीमेंट पसंद नहीं आया तो अमेरिका युद्ध में लौट सकता है. उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में सैन्य कार्रवाई का विकल्प मेज पर होगा।
जी7 शिखर सम्मेलन में ट्रंप के इस बयान को ईरान के लिए सीधी चेतावनी माना जा रहा है. एक तरफ अमेरिका समझौते की संभावना को खुला रखना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ यह संदेश भी दे रहा है कि वो अपने रणनीतिक हितों से किसी तरह का समझौता नहीं केरगा।
अब्देल फत्ताह अल-सिसी के साथ हुई इस बैठक ने साफ कर दिया है कि ईरान पर अमेरिकी नीति अभी भी डिप्लोमेसी और दबाव के दोहरे फार्मूले पर बढ़ रही है।
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