रांची
बिरसा मुंडा एयरपोर्ट को देश के अत्याधुनिक और सुरक्षित हवाई अड्डों की श्रेणी में शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू हो गई है।
एयरपोर्ट परिसर में विशेष आईसोलेशन वे के निर्माण की तैयारी अंतिम चरण में पहुंच गई है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) ने इस परियोजना को मंजूरी दे दी है।
रनवे-तीन क्षेत्र में इसके लिए जमीन भी चिह्नित कर ली गई है। 20 एकड़ क्षेत्र इस परियोजना के लिए विकसित किया जाएगा। प्रस्तावित आईसोलेशन वे की लंबाई करीब 350 मीटर और चौड़ाई 30 मीटर होगी।
विमानों की आवाजाही के लिए 20 मीटर चौड़ा मार्ग बनाया जाएगा, जबकि दोनों ओर 3.5-3.5 मीटर चौड़ा शोल्डर होगा, जहां लाइटिंग और अन्य सुरक्षा उपकरण लगाए जाएंगे।
रांची एयरपोर्ट में यह सुविधा शुरू होने के बाद झारखंड को भी देश के उन चुनिंदा एयरपोर्ट्स में स्थान मिलेगा, जहां किसी भी सुरक्षा चुनौती से निपटने के लिए अलग ऑपरेशन जोन उपलब्ध होगा।
आपात स्थिति में होगा उपयोग
हाल के दिनों में विमान में बम रखने, एयरपोर्ट को उड़ाने और हाईजैक जैसी धमकियों की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए रांची एयरपोर्ट को संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है।
ऐसे में करीब 15 से 20 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह आइसोलेशन वे सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी राहत साबित होगा।
आईसोलेशन वे ऐसी विशेष सुविधा है, जहां किसी संदिग्ध या आपात स्थिति वाले विमान को सामान्य परिचालन क्षेत्र से अलग ले जाकर खड़ा किया जाता है।
विमान में बम की सूचना, हाईजैक की आशंका, संक्रमण फैलने का खतरा अथवा किसी संवेदनशील उड़ान की सुरक्षा जैसे मामलों में इसका उपयोग किया जाता है। इससे यात्रियों, अन्य विमानों और एयरपोर्ट संचालन पर खतरे का असर नहीं पड़ता।
परियोजना का डिजाइन स्वीकृत हो चुका है और प्लानिंग अंतिम चरण में है। जमीन उपलब्ध होते ही निर्माण शुरू कर दिया जाएगा। आपात स्थिति में विमान को सीधे आईसोलेशन वे में भेजकर सुरक्षा एजेंसियां विशेष अभियान चला सकेंगी, जिससे एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी।
विनोद कुमार, निदेशक एयरपोर्ट
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