अमृतसर.
सरकारी मेडिकल कॉलेज गुरु नानक देव अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञों की टीम ने मात्र छह माह के शिशु के जन्मजात हृदय दोष का उपचार कर चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।
शिशु का वजन केवल 4.5 किलोग्राम था और वह अपेक्षित शारीरिक विकास नहीं कर पा रहा था।
चिकित्सकीय भाषा में इस स्थिति को पीडीए (पेटेंट डक्टस ऑर्टेरियोसस) कहा जाता है। यह एक जन्मजात हृदय विकार है, जिसमें जन्म के बाद हृदय से जुड़ी एक रक्तवाहिनी नहीं होती। कम वजन वाले शिशुओं में इस रोग का उपचार करने की प्रक्रिया और चुनौतीपूर्ण है। हृदय रोग विशेषज्ञ डा. परमिंदर सिंह मांगेड़ा के अनुसार, चिकित्सकों की टीम ने आधुनिक लाइफटेक वैस्कुलर प्लग उपकरण की सहायता से शिशु के हृदय दोष को सफलतापूर्वक बंद किया।
चिकित्सा दल ने इस सफलता का श्रेय ईश्वर की कृपा, वरिष्ठ चिकित्सकों के मार्गदर्शन और पूरी टीम के सामूहिक प्रयास को दिया। इस प्रक्रिया में डा. वीना, डा. मिलिंद तथा एनेस्थीसिया विभाग की पूरी टीम का विशेष योगदान रहा।
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